उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाला: दो सेवानिवृत्त और एक अफसर की जमानत नामंजूर
- तीनों ने अलग-अलग अर्जियां अदालत में की थी पेश
- समाज कल्याण विभाग के पूर्व और वर्तमान अधिकारी हैं जेल में बंद
- विभाग के संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल भी किए जा चुके हैं गिरफ्तार
विस्तार
छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपी समाज कल्याण विभाग के दो सेवानिवृत्त और एक वर्तमान अधिकारी की विशेष न्यायाधीश सीबीसीआईडी और सतर्कता श्रीकांत पांडेय की अदालत ने आज जमानत नामंजूर कर दी है।
तीनों ने अलग-अलग अर्जियां अदालत में प्रस्तुत की और पूर्व में आरोपियों की जमानत का आधार न्यायालय के समक्ष रखा गया। लेकिन, अदालत ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में रखते हुए तीनों की अर्जियां खारिज कर दीं।
करोड़ों रुपये के इस घोटाले में हरिद्वार के सेवानिवृत्त सहायक समाज कल्याण अधिकारी विनोद नैथानी, मुनीश कुमार त्यागी और वर्तमान सहायक समाज कल्याण अधिकारी सोमप्रकाश सिंह जेल में बंद हैं। शासकीय अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि तीनों की ओर से अदालत में जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया था।
तीनों के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने बिना अपने उच्चाधिकारियों की मर्जी के कुछ नहीं किया। अंतिम निर्णय उनके उच्चाधिकारी का ही है। लेकिन, इस प्रकरण में उनके उच्चाधिकारियों को जमानत मिल चुकी है। लिहाजा, उन्हें भी जमानत दे दी जाए। बचाव पक्ष के इस तर्क को अदालत ने निराधार ठहराया।
पूर्णतया गंभीर प्रकृति का आर्थिक अपराध
अदालत ने अभियोजन के तर्क को माना कि यह मामला आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की छात्रवृत्ति हड़पने का है। यह पूर्णतया गंभीर प्रकृति का आर्थिक अपराध है। चूंकि, भौतिक सत्यापन इन अधिकारियों की ही जिम्मेदारी थी, जिसे उन्होंने कानूनी रूप से पूरा नहीं किया।
अदालत ने पूर्व में कुछ अधिकारियों और अन्य लोगों की जमानत के तर्क को भी खारिज किया और कहा कि किसी की जमानत इस न्यायालय से मंजूर नहीं हुई है। लिहाजा, तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं।
नौटियाल की जमानत पर सोमवार को होगी सुनवाई
गीताराम नौटियाल को एसआईटी ने शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया था। उसके बाद उन्हें 14 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस दौरान नौटियाल ने जमानत अर्जी भी प्रस्तुत की थी, लेकिन अभियोजन ने इस पर समय मांग लिया था। अब इस प्रार्थनापत्र पर चार नवंबर (सोमवार) को सुनवाई होगी।