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सिर्फ 40 मिनट मुलाकात और छूट गया सरबजीत का साथ
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 28 Dec 2013 05:16 PM IST
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पति के साथ अंतिम बार हुई 40 मिनट की मुलाकात सरबजीत सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर को आज भी कुरेदती रहती हैं। 18 साल बाद मुलाकात और फिर हमेशा के लिए बिछड़ने का गम उन्हें सताता रहता है।
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वहीं सरबजीत की बहन दलबीर कौर की आंखों में भाई के इंतजार में 23 साल तक राखियां जमा करने के बावजूद उन्हें नहीं बांध पाने का दर्द साफ झलकता है।
शुक्रवार को एक कार्यक्रम में भाग लेने दून आई दलबीर कौर और सुखप्रीत कौर के दिल की बातें कुछ सुनकर लोगों की आंखे छलक आईं।
नहीं हो पाई ठीक से बात
पाकिस्तान की जेल में बर्बरता का शिकार हुए सरबजीत सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर ने बताया कि वर्ष 2008 में 40 मिनट की मुलाकात में वे अच्छी तरह बात भी नहीं कर सकीं थीं।
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वर्ष 1990 में सुखप्रीत को अपने पति के पकड़े जाने का पता चला, जिसके बाद वे उनकी रिहाई की प्रार्थना के लिए हर रोज अरदास करती रहीं। गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान चले जाने पर भी उनको मौत की सजा सुना दी गई।
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पत्रों से मिलता था सुकून
सुखप्रीत ने बताया कि पत्र आने से उनको पति के जिंदा होने की खबर पता चलती तो राहत मिलती। उनके पति ने उन्हें करीब दो से ढाई सौ चिट्ठियां भेजी थी। पत्र में हर बार अपनी बेटियों को प्यार करने की बात लिखा करते थे।
सरबजीत को 23 दिन की बेटी पूनम, जो अब 23 साल की हो गई है, से दूर होने का दुख हमेशा सालता रहता था। हर चिट्ठी में वे दोनों बेटियों को गले लगाकर उनके हिस्से का भी प्यार देने की बात करते थे। आज उनकी बड़ी बेटी स्वप्नदीप जालंधर में तहसीलदार की ट्रेनिंग कर रही है।
23 साल सहेजी राखियां, चिता में गईं : दलबीर
जिस भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की, हाथ में राखी बांधी, इंतजार में 23 साल राखियां सहेजकर रखीं, आखिर में उसकी चिता को अपने हाथों से अग्नि दी।
"मेरी इच्छा थी कि वह मेरी चिता को आग दे, लेकिन हुआ उल्टा। काश भाई वापस आता.."। आंखों से छलकते आंसुओं और रुआंसी आवाज में दलबीर कौर ने शुक्रवार को यह बात कही।
सरकार ने नहीं किया प्रयास
दलबीर कौर ने कहा कि सरकार ने गंभीरता से रिहाई के लिए पहल की होती तो आज भाई साथ होता। बाबा रामदेव और बालकृष्ण से भी उन्होंने मदद मांगी थी। अगर उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाता तो सरकार पर दबाव बन सकता था।
जेल में किया जाता था अपमानित
उन्होंने कहा कि टीवी पर दूसरे के दर्द को समझाने वाले लोग वास्तव में कुछ नहीं करते। रुआंसे गले से दलबीर ने बताया कि सरबजीत ने उन्हें बताया था कि पाक की जेल में उसको ऐसा खाना मिलता है, जो कोई न खा सके।
23 साल जेल में रहते हुए वह खाने का स्वाद ही भूल गया था। जेल में न तो पेट भर खाना मिलता था और न पानी। पानी मांगने पर अपमानित किया जाता था।
दलबीर कौर ने कहा कि केंद्र सरकार आज पाकिस्तान से शांतिवार्ता और दोस्ती की बात करती है, लेकिन पाकिस्तान में कभी किसी भारतीय या सिख को जीने का हक नहीं मिल सकता। पाकिस्तान यह नहीं देखता कि भारत में उपराष्ट्रपति के पद पर मुस्लिम बैठा है।
आपदा में दिखा अपना दर्द
कहा कि उत्तराखंड में आई आपदा से प्रभावित लोगों के दर्द और बिलखते बच्चों को देखकर अपना दर्द याद आ गया था। यहां बहुत प्यार मिला है। यहां के लोगों को मैं नमन करती हूं।