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Dehradun News: सीएम से सम्मान पाकर खिले संतों के चेहरे, कुंभ को भव्य बनाने में देंगे सहयोग
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- डामकोठी में संतों के साथ बैठक के बाद जगद्गुरु आश्रम पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। अर्द्धकुंभ को पूर्ण कुंभ बनाने के लिए की बैठक सफल रही। बीते दिनों अखाड़ों के संतों में असंतोष के बीच जब सीएम ने संतों का सम्मान किया तो सभी के चेहरे खिल उठे। अखाड़ों से शामिल प्रतिनिधियों ने कुंभ को भव्य और दिव्य बनाने में पूर्ण सहयोग के लिए आश्वस्त किया। संतों के साथ बैठक के बाद सीएम जगद्गुरु आश्रम पहुंचे। उन्होंने कुंभ आयोजन के लिए जगद्गुरु से चर्चा की और आशीर्वाद लिया।
मुख्यमंत्री ने कुंभ के सफल आयोजन के लिए अखाड़ों के आचार्यों से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ से जुड़े सभी निर्णयों में संतगणों की परंपराओं, आवश्यकताओं और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य है कि कुंभ के सुव्यवस्थित और भव्य आयोजन के लिए उन्हें संतगणों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि संतों की प्रेरणा, सुझाव और आशीर्वाद के बिना इस महायोजना की पूर्णता की कल्पना भी संभव नहीं है। हमारा प्रयास है कि सभी के अमूल्य सुझावों से कुंभ 2027 की तैयारियों को और अधिक व्यापक, सुव्यवस्थित और संत समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाया जा सके।
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कोरोना काल की कसक दूर करने के लिए लिया गया निर्णय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अर्धकुंभ को दिव्य और भव्य कुंभ के रूप में आयोजित करने के पीछे कोरोनाकाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में कुंभ का आयोजन कोरोना काल के चलते व्यवस्थित नहीं हो सका। इसके लिए अर्धकुंभ को कुंभ का रूप देकर आध्यात्मिक राजधानी के रूप में देवभूमि उत्तराखंड को स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में होने वाला हरिद्वार कुंभ कई दृष्टिकोण से ऐतिहासिक और विशेष महत्व का होगा। इस बार आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2010 और 2021 के कुंभ की तुलना में कई गुना अधिक होने की संभावना है।
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राज्य और केंद्र की एजेंसियां करेंगी श्रद्धालुओं और संतों की सुरक्षा
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 2027 कुंभ के लिए राज्य और केंद्र की एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करेंगी। श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सुरक्षा के लिए राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी, स्वास्थ्य विभाग और फायर विभाग सहित सभी संबंधित विभाग सुरक्षा के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए सभी संभव उपाय सुनिश्चित करेंगे। कुंभ के दौरान पूर्व में घटित दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आकस्मिक आपात स्थिति की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी गई है। पूर्व में आयोजित कुंभ मेलों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले अधिकारियों का भी पूर्ण सहयोग लिया जाएगा, ताकि हर प्रक्रिया सुचारु और व्यवस्थित रूप से संचालित हो सके। कुंभ के दौरान नगर और घाट क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए विशेष टीमों का गठन कर कचरा प्रबंधन, जल निकासी और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। अर्द्धकुंभ को पूर्ण कुंभ बनाने के लिए की बैठक सफल रही। बीते दिनों अखाड़ों के संतों में असंतोष के बीच जब सीएम ने संतों का सम्मान किया तो सभी के चेहरे खिल उठे। अखाड़ों से शामिल प्रतिनिधियों ने कुंभ को भव्य और दिव्य बनाने में पूर्ण सहयोग के लिए आश्वस्त किया। संतों के साथ बैठक के बाद सीएम जगद्गुरु आश्रम पहुंचे। उन्होंने कुंभ आयोजन के लिए जगद्गुरु से चर्चा की और आशीर्वाद लिया।
मुख्यमंत्री ने कुंभ के सफल आयोजन के लिए अखाड़ों के आचार्यों से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ से जुड़े सभी निर्णयों में संतगणों की परंपराओं, आवश्यकताओं और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य है कि कुंभ के सुव्यवस्थित और भव्य आयोजन के लिए उन्हें संतगणों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि संतों की प्रेरणा, सुझाव और आशीर्वाद के बिना इस महायोजना की पूर्णता की कल्पना भी संभव नहीं है। हमारा प्रयास है कि सभी के अमूल्य सुझावों से कुंभ 2027 की तैयारियों को और अधिक व्यापक, सुव्यवस्थित और संत समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाया जा सके।
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कोरोना काल की कसक दूर करने के लिए लिया गया निर्णय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अर्धकुंभ को दिव्य और भव्य कुंभ के रूप में आयोजित करने के पीछे कोरोनाकाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में कुंभ का आयोजन कोरोना काल के चलते व्यवस्थित नहीं हो सका। इसके लिए अर्धकुंभ को कुंभ का रूप देकर आध्यात्मिक राजधानी के रूप में देवभूमि उत्तराखंड को स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में होने वाला हरिद्वार कुंभ कई दृष्टिकोण से ऐतिहासिक और विशेष महत्व का होगा। इस बार आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2010 और 2021 के कुंभ की तुलना में कई गुना अधिक होने की संभावना है।
राज्य और केंद्र की एजेंसियां करेंगी श्रद्धालुओं और संतों की सुरक्षा
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 2027 कुंभ के लिए राज्य और केंद्र की एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करेंगी। श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सुरक्षा के लिए राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस, एनडीआरएफ, पीएसी, स्वास्थ्य विभाग और फायर विभाग सहित सभी संबंधित विभाग सुरक्षा के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए सभी संभव उपाय सुनिश्चित करेंगे। कुंभ के दौरान पूर्व में घटित दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आकस्मिक आपात स्थिति की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी गई है। पूर्व में आयोजित कुंभ मेलों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले अधिकारियों का भी पूर्ण सहयोग लिया जाएगा, ताकि हर प्रक्रिया सुचारु और व्यवस्थित रूप से संचालित हो सके। कुंभ के दौरान नगर और घाट क्षेत्रों की स्वच्छता के लिए विशेष टीमों का गठन कर कचरा प्रबंधन, जल निकासी और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।