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नकली दवा फैक्टरी मामला: एक आरोपी फार्मा कंपनी में था सुपरवाइजर, दूसरा करता था मार्केटिंग का काम
Mon, 16 Oct 2023 04:24 PM IST
देहरादून ब्यूरो
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 16 Oct 2023 04:24 PM IST
सार
देहरादून के रायपुर क्षेत्र में दिसंबर 2022 में उन्होंने एसएस मेडिकोज नाम से एक फर्म खोली। इसमें दोनों पार्टनर हैं। इसी फर्म के माध्यम से वह दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता आदि शहरों में दवाई सप्लाई करते थे।
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नकली दवा (सांकेतिक)
- फोटो : istock
विस्तार
नकली दवा की फैक्टरी चलाने वाले सचिन और विकास पहले से ही दवा निर्माण क्षेत्र से जुड़े हुए थे। दोनों एक दूसरे को जानते थे।सचिन दवा कंपनी स्टेपफोर्ड लैबोरट्री लिमिटेड भगवानपुर में सुपरवाइजर था, तो विकास जगसन पाल फार्मास्युटिकल्स कंपनी में हरिद्वार में मार्केटिंग का काम करता था। नौकरी करते हुए दोनों ने दवाओं के बाजार को लेकर काफी जानकारी जुटा ली थी। इस बीच कोरोना काल में उनकी नौकरी छूट गई। इसके बाद दोनों ने नौकरी करने के बजाय जगसन पाल व वर्लटर बूसनल कंपनी की नकली दवाएं तैयार कर मार्केट में बेचने का प्लान बनाया।
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दोनों ने कई फर्म खोलीं। सभी को जीएसटी में पंजीकरण कराया। देहरादून के रायपुर क्षेत्र में दिसंबर 2022 में उन्होंने एसएस मेडिकोज नाम से एक फर्म खोली। इसमें दोनों पार्टनर हैं। इसी फर्म के माध्यम से वह दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता आदि शहरों में दवाई सप्लाई करते थे। इससे जो लाभ होता था उसे दोनों बराबर बांट लेते थे।
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मुंबई की रोलेक्स फार्मा कंपनी से खरीदते थे कच्चा माल
आरोपियों ने बताया कि दवाई बनाने के लिए मकदूमपुर गांव में फैक्ट्री खोली थी। वहीं मशीनें रखी हैं। कच्चा माल मुंबई की रोलेक्स फार्मा की एक कंपनी से खरीदते थे। भुगतान ऑनलाइन करते थे। वहां से कच्चा माल विजयलक्ष्मी ट्रांसपोर्ट से रुड़की आता था, जिसे रुड़की में उतारकर अपनी फैक्ट्री में ले जाते है। कच्चे माल की डिलीवरी हफ्ते में ली जाती है। उसके बाद वहां दोनों फार्मास्युटिकल कंपनी एवं अन्य कंपनी की दवाओं को उनके कंपोजीशन के आधार पर कुछ कम मात्रा में भरकर नकली दवाएं बनाते थे।
दिल्ली व भगवानपुर से लाते थे दवाओं के लिए रैपरI
आरोपी दवाओं के लिए रैपर दिल्ली और भगवानपुर में एक व्यक्ति को प्रिंट करने के लिए देेते थे। उन्हें 800 रुपये किलो के हिसाब से रैपर प्रिंट कर देता था। सचिन सारे कूटरचित बिल अपने लैपटाॅप पर एडिट करके तैयार करता था।
एक हफ्ते में कर लेते थे दस पेटी दवा तैयार
आरोपी सचिन ने बताया कि मार्केटिंग में होने के कारण विकास का पहले से ही डीलरों से संपर्क था। वह एक हफ्ते में 10 पेटी करीब 200 डिब्बे तैयार कर लेते थे।
करोड़ों की संपत्ति की अर्जितI
आरोपियों ने बताया कि दवाएं बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ और कई संपत्तियां अर्जित की। सचिन ने रेंज रोवर कार भी इन्हीं पैसों से ली है। इसके अतिरिक्त विकास ने रुड़की में 35 लाख रुपये का प्लाॅट व 12 लाख रुपये की किया सोनेट कंपनी की गाड़ी खरीदी है। इसके अतिरिक्त उषा एन्क्लेव में 50 लाख रुपये का मकान व मकदूनपुर में फैक्ट्री के लिए चार बीघा जमीन भी ली है। इस फैक्ट्री स्थापित करने की योजना थी।