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अपने ही घर में कैदी बन रह रही दोनों बहनों को मिलेगी नई जिंदगी

Tue, 08 Dec 2015 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 08 Dec 2015 10:20 PM IST
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ruchi and vijaya came in hospital, strange disease to sister.

चमोली जिले के काणा तोक में तीन साल से अपने ही घर के एक कमरे में कैद दो बच्चियों को जल्द नई जिंदगी मिलेगी। मंगलवार को स्वास्थ्य और तहसील प्रशासन की टीम काणा तोक पहुंची। दोनों बच्चियों को डेढ़ किमी पैदल लोगों की मदद से और इसके बाद बीस किमी 108 के वाहन से जिला अस्पताल के इमरजेंसी में लाया गया। अब इनका इलाज देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में होगा।

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काणा गांव की दो बालिकाएं 16 साल की रुचि और 13 साल की विजया तीन साल से एक ही कमरे में कैद थीं। वह घर से बाहर सूर्य की रोशनी में आते ही लड़खड़ा कर गिर पड़ती थीं। उनकी आंखें बंद हो जाती हैं और रोने लगती थीं। गरीबी के कारण माता-पिता इनका इलाज नहीं करवा पा रहे थे।
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मंगलवार को यह खबर अखबार में प्रकाशित होने पर प्रशासन ने इसका संज्ञान लिया। नायब तहसीलदार मंजू राजपूत, स्कूल हेल्थ दशोली टीम के डॉ. राहुल बिष्ट, डॉ. निश्चल जोशी, चमोली के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विनय शर्मा और फार्मेसिस्ट आरपी सती मंगलवार सुबह नौ बजे ही ग्राम पंचायत कौंज-पोथनी गांव के काणा तोक पहुंचे।

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देहरादून के अस्पताल में सरकारी खर्च पर होगा इलाज

ruchi and vijaya came in hospital, strange disease to sister.

दोनों बच्चियों को दोपहर गोपेश्वर लाया गया। यहां इमरजेंसी में चिकित्सकों ने दोनों का प्राथमिक उपचार किया। डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चियां बहुत घबराई हुई हैं। इलाज के बाद ही इनके रोग का सही पता चल पाएगा। डिप्टी सीएमओ डॉ. बीएस पाल ने बताया कि दोनों बहनों को एंबुलेंस से देहरादून स्थित कोरोनेशन अस्पताल में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। वहां सरकारी खर्चे पर उनका इलाज होगा।

इमरजेंसी वार्ड में भी ढूंढती रहीं अंधेरा
रुचि और विजया जिला अस्पताल के इमरजेंसी हाल में लगे पर्दों से मुंह छिपाती रहीं। वे यहां भी अंधेरा ढूंढती रहीं। कई बार स्ट्रेचर से गिरते-गिरते बची। दोनों बहनें कई बार सामान्य होकर लोगों के चेहरों को एकटक देखती तो उसके बाद एकाएक उनकी आंखें चुंधियाने लगती और वे बेड में मुंह छुपा कर रोने लगतीं।

क्या कहते हैं माता-पिता
गरीबी के कारण अपनी बच्चियों का इलाज नहीं करा पा रहे थे। आज मीडिया की बदौलत रुचि और विजया को इलाज मिल सकेगा। अब हमारी बेटियों को नई जिंदगी मिल जाएगी। तीन साल से बेटियों की इस अजीब बीमारी ने हमारी भी कमर तोड़ दी थी। अब आस जगी है कि हमारी बेटियां नई जिंदगी जी सकेंगी।
-दलीप सिंह और बच्ची देवी, रुचि व विजया के माता-पिता।

निम ने भी दिलाया इलाज का भरोसा

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नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल की टीम ने इन दोनों बहनों का इलाज दिल्ली के किसी बड़े अस्पताल में कराने का निर्णय लिया है। निम के ओमेंद्र पंवार का कहना है कि दोनों बच्चियों को हरसंभव मदद दी जाएगी।

विधायक ने अस्पताल में हाल जाना
गोपेश्वर। बदरीनाथ विधायक राजेंद्र भंडारी ने अस्पताल पहुंचकर रुचि और विजया का हालचाल जाना। उन्होंने कहा कि बुधवार सुबह सात बजे एंबुलेंस से दोनों को उनके माता-पिता समेत देहरादून भेजा जाएगा। साथ में जिला अस्पताल से डा. निशा जोशी को भी भेजा जा रहा है।

कागजों में सिमटी हैं योजनाएं
सरकार की ओर से स्कूल हेल्थ प्रोग्राम, सर्व शिक्षा और आंगनबाड़ी के माध्यम से बच्चों के शैक्षणिक उन्नयन के साथ-साथ स्वास्थ्य परीक्षण पर विशेष ध्यान देने के नाम पर प्रतिवर्ष भारी भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, लेकिन यह योजनाएं कागजों तक सिमट गई हैं। जिला चमोली के काणा गांव की बच्चियों को देखकर तो यही लगता है। कौंज-पोथनी गांव में स्वास्थ्य विभाग की एएनएम भी तैनात है, लेकिन डिप्टी सीएमओ डा. बीएस पाल का कहना है कि जिला स्तर से सूचना आने में चूक हुई है।

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