उत्तराखंड निकाय चुनाव के बाद शुरू हुआ रुड़की का रण, टिकट के लिए दून से दिल्ली तक की दौड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद जल्द ही नगर निगम रुड़की में चुनावी रणभेरी बजने वाली है। प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट के आदेशानुसार, 31 दिसंबर तक रुड़की नगर निगम के चुनाव कराने हैं। लिहाजा प्रदेश सरकार ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उधर, टिकट के दावेदारों ने देहरादून से दिल्ली तक अपने आकाओं की परिक्रमा करनी शुरू कर दी है। रुड़की में भाजपा और कांग्रेस में दावेदारों की लंबी लाइन है, लेकिन दोनों पार्टियों में अधिकतम दस दावेदार प्रमुख माने जा रहे हैं।
प्रदेशभर में निकाय चुनाव के साथ रुड़की नगर निगम के चुनाव नहीं हो सके थे। तीन साल पूर्व नगर निगम में शामिल किए गए दो गांव रामपुर और पाड़ली गुज्जर को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच की रस्साकसी हाईकोर्ट तक जा पहुंची थी। परिसीमन की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण प्रदेश सरकार ने सभी निकायों के साथ यहां के चुनाव कराने पर हाथ खड़े कर दिए थे।
हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को रुड़की के चुनाव 31 दिसंबर तक हर हाल में संपन्न कराने के निर्देश दिए थे। अभी तक सरकार का ध्यान अन्य सीटों पर चुनाव कराने पर था, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में रुड़की चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि रामपुर और पाड़ली गुज्जर को निगम से बाहर करने के लिए सरकार विधेयक का सहारा लेगी और इसके बाद चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। इन सबके बीच अचानक तेज हुई चुनावी सरगर्मी के बाद भाजपा, कांग्रेस और अन्य पार्टियों से टिकट के दावेदारों ने दिल्ली और देहरादून में बैठे अपने राजनीतिक आकाओं की परिक्रमा शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार, भाजपा हाईकमान की ओर से यहां वैश्य समाज के प्रत्याशी को टिकट देेेने का मन बना लिया है। ऐसे में इस समाज के कई दावेदार सक्रिय हो गए हैं। माना जा रहा है कि भाजपा से टिकट की दौड़ के आखिरी चरण में तीन प्रमुख दावेदारों के बीच भारी रस्साकसी होगी
टिकट पाने को संघ का सहारा
बीते वर्षों के चुनाव में संघ की पृष्टभूमि से आने वाले नेताओं को भाजपा में टिकट दिए जा रहे हैं। इसे लेकर नेताओं की एक बड़ी लॉबी संघ के साथ जुड़ी हुई है। प्रदेश से लेकर केंद्र तक आरएसएस के कई नेताओं का टिकट आवंटन में अहम रोल माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, टिकट के दावेदार पार्टी नेताओं के साथ-साथ संघ में अहम ओहदा रखने वाले वालों से संपर्क करने में भी जुट गए हैं।