अब गंगा नदी का जल यमुना को बनाएगा निर्मल
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उत्तरप्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से वृंदावन (बृज भूमि) से होकर बहने वाली यमुना नदी में हरिद्वार की गंगनहर का पानी छोड़कर इसे शुद्ध करने और उसके घाटों के सुंदरीकरण की योजना पर आईआईटी ने मुहर लगा दी है।
गंगनहर से पानी छोड़ने से यमुना में प्रदूषणकारी बीओडी मात्रा में काफी कमी आई है। इसके अलावा योजना के तहत यमुना के घाटों और इसके आसपास के सुंदरीकरण के लिए 1177.81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यही यमुना वृंदावन से चल इलाहाबाद संगम में गंगा में मिलती है। इस कवायद से गंगा को निर्मल बनाने का मकसद पूरा हो सकेगा।
यमुना नदी उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदी एवं गंगा की सहायक नदी है। यह अपने उद्गम स्थल यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलकर करीब 1376 किलोमीटर की यात्रा करते हुई यूपी के सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, वृंदावन, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, औरेया, इटावा, जालौन, कानपुर देहात, फतेहपुर, हमीरपुर और बांदा से होते हुए इलाहाबाद में गंगा में मिलती है।
गंदे नालों से प्रदूषित हो रही यमुना
यमुना इसमें मिल रहे कई गंदे नालों से प्रदूषित हो रही है। वृंदावन घाट पर प्रदूषण के कारण यमुना का पानी स्नान एवं आचमन के उपयुक्त नहीं था।
यमुना में प्रदूषण को कम करने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से हाल ही में अपर गंगा कैनाल से 650 क्यूसेक पानी कोट स्केप के जरिए यमुना में छोड़ा दिया गया है। उसके बाद से यहां जीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी आक्सीजन की मात्रा छह ग्राम प्रति लीटर तक आ गई है।
योजना के तहत अब वृंदावन घाटों एवं इसके आसपास का सुंदरीकरण किया जाएगा। यूपी सिंचाई विभाग की 1117.81 करोड़ रुपये की इस योजना पर आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. कमल जैन पर्यावरणीय रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इसमें योजना को उपयुक्त बताया है।
नालों और औद्योगिक इकाइयों से बढ़ा प्रदूषण
वृंदावन में छह गंदे नाले और औद्योगिक इकाइयां की गंदगी यमुना में मिल रही है।
योजना के तहत इन सभी नालों को पानी परिक्रमा मार्ग के सहारे करीब 2000 मीटर लंबाई में इंटरसैप्टिंग ड्रेन का निर्माण कर इसमें छोड़ा जाएगा और इसके बाद इसे एसटीपी से जोड़ा जाएगा।
नदी के किनारे 15.75 एकड़ में लैंड स्के प एवं सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा। इसमें 32 हजार पेड़ लगाएं जाएंगे। इसके अलावा 225 मीटर लंबे पुराने घाटों का पुनरुद्धार एवं 500 मीटर लंबाई के नए घाटों का निर्माण भी किया जाएगा।