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आरक्षण:वरिष्ठता निर्धारण में ऐतिहासिक आदेश पर खुश कोई नहीं, फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी

Thu, 24 Feb 2022 01:34 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 24 Feb 2022 01:34 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में एक आदेश दिया था, जिसके तहत पेयजल निगम में वरिष्ठता निर्धारण को आरक्षण रोस्टर लागू करने को कहा गया था।

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Reservation: historical order in determining the seniority, but no one is happy, again ready to knock Supreme Court door
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

पेयजल निगम में कर्मचारियों की वरिष्ठता मेरिट के बजाए आरक्षण रोस्टर के आधार से तय करने का ऐतिहासिक आदेश तो हुआ है, लेकिन इससे खुश कोई नहीं है। न तो आदेश करने वाला पेयजल निगम, न ही लाभ के दायरे में आने वाले कर्मचारी और न ही जनरल-ओबीसी कर्मचारी संगठन। सभी अपने-अपने तरीके से इस पर विरोध जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा फिर खटखटाने की तैयारी में हैं।

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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में एक आदेश दिया था, जिसके तहत पेयजल निगम में वरिष्ठता निर्धारण को आरक्षण रोस्टर लागू करने को कहा गया था। आदेश के अनुपालन में देरी होने के चलते कर्मचारी दोबारा अवमानना की शिकायत लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे।

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वरिष्ठता सूची को निरस्त करने की मांग

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए चार सप्ताह के भीतर इस आदेश को लागू करने को कहा। लिहाजा, पेयजल निगम ने तत्काल आदेश लागू कर दिया। अब आदेश तो लागू हो गया लेकिन इससे कोई भी खुश नहीं है। पेयजल निगम इस आदेश को लागू करने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी में है।

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पे उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन इसे लागू करने पर सख्त विरोध जताते हुए इस वरिष्ठता सूची को निरस्त करने की मांग कर रहा है। जबकि उत्तराखंड एससी-एसटी इंप्लाइज फेडरेशन मांग कर रहा है कि जो अधूरा लाभ दिया गया है, उसे 2005 के बजाए नौ नवंबर 2000 से दिया जाए। यह सभी अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा दोबारा खटखटाने की तैयारी भी कर रहे हैं। 

सर्वोच्च न्यायालय में पूर्व में आदेश आया था। पुन: चार हफ्ते में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए थे। उसका पालन किया गया है। यह विशेष आदेश है,जो अन्य विभागों पर लागू नहीं है। पेयजल निगम की ओर से पुनर्विचार याचिका भी दायर की जाएगी। -नितेश झा, सचिव, पेयजल


पेयजल निगम ने आदेश लागू किया, इसके लिए आभार। लेकिन निगम ने इसे 2005 से गलत तरीके से लागू किया है। जब प्रदेश की स्थापना नौ नवंबर 2000 को हुई थी तो यह रोस्टर भी उसी दिन से लागू किया जाना चाहिए। हम सरकार से मांग करते हैं कि इसमें सुधार करे, नहीं तो हम इसके लिए सुप्रीम कोर्ट जाने को बाध्य होंगे। -करम राम, अध्यक्ष, उत्तराखंड एससी-एसटी इंप्लाइज फेडरेशन

2006 में आए शासनादेश से स्पष्ट है कि रोस्टर आरक्षण कोटा को भरने में मदद करने के लिए है न कि वरिष्ठता निर्धारित करने के लिए। हम मांग करते हैं कि इस वरिष्ठता सूची को तत्काल निरस्त करते हुए दोबारा अनंतिम वरिष्ठता सूची जारी करते हुए निर्धारित समयसीमा में प्रत्यावेदन मांगे जाएं। शासन की नीतियों और स्थापित नियमों का सही तरीके से प्रस्तुतिकरण न कर पाने वाले अधिकारियों व शासकीय अधिवक्ताओं को हटाया जाए।
 -अनंद भदूला, अध्यक्ष, उत्तराखंड पेयजल निगम जनरल-ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन

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