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शोध : पहाड़ों पर इचिनोकोकोसिस नामक दुर्लभ बीमारी की चपेट में आ रहे लोग

Mon, 01 Sep 2025 02:25 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 01 Sep 2025 02:25 AM IST
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Research: People are falling prey to rare diseases
पहाड़ों पर लोगों में सिस्टिक इचिनोकोकोसिस नामक दुर्लभ बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। लाइफ जर्नल की ओर से वर्ष 2024 में जारी की गई शोध रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसमें संदिग्ध 110 मरीजों में से 12 में बीमारी की पुष्टि हुई है।
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कश्मीर के श्रीनगर में रहने वाले लोगों पर किए गए शोध की तर्ज पर अब उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों से आने वाले इस तरह के संदिग्ध मरीजों पर भी अध्ययन किया जा रहा है। उत्तराखंड में होने वाला यह पहला अध्ययन होगा जो राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. अभय कुमार की ओर से किया जा रहा है। लाइफ जर्नल की शोध रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर के श्रीनगर क्षेत्र में वर्ष 2019 से लेकर 2024 तक 110 संदिग्ध मरीजों पर अध्ययन किया गया। इसमें से 12 मरीज सिस्टिक इचिनोकोकोसिस नामक दुर्लभ बीमारी से ग्रसित मिले। इसमें चार पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थीं।
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इनकी औसत उम्र 46 से 58 वर्ष दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों ने जब इसके मूल कारणों को जानने का प्रयास किया तो चौंकाने वाले कारण सामने आए। पता चला कि जिस क्षेत्र में लोग भेड़, बकरी और कुत्तों को एक साथ पालते हैं वहां इचिनोकोकस ग्रैनुलोसस नाम का एक परजीवी पनपता है। यह फल और सब्जी जैसे खाद्य पदार्थों के माध्यम से मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह परजीवी लीवर और फेफड़ों पर हमला कर एक जहरीली गांठ तैयार करता है जो जानलेवा भी हो सकती है।
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उत्तरकाशी, चमोली और टिहरी से खतरा अधिक
वरिष्ठ सर्जन डॉ. अभय कुमार के मुताबिक वैसे तो उत्तराखंड के सभी पर्वतीय जिलों से इसके मरीज सामने आते हैं लेकिन उत्तरकाशी, चमोली और टिहरी से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। पिछले कुछ वर्षों में अब तक 25 सिस्टिक इचिनोकोकोसिस के मरीज मिल चुके हैं। उनकी ओर से सभी संदिग्ध मरीजों पर पूर्वप्रभावी विधि से अध्ययन किया जा रहा है। इसके परिणाम जल्द ही जारी किए जाएंगे। इसमें खास बात यह है कि इसके लक्षण शुरुआत में सामने नहीं आते। गांठ 10 सेंटीमीटर से अधिक बड़ी होने के बाद लोगों में लक्षण दिखते हैं। इसमें पेट दर्द, भूख न लगना और उल्टी होना आदि लक्षण शामिल हैं।
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