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Dehradun News: अल्पसंख्यक संस्थानों को धार्मिक पाठ्यक्रम में छूट

Wed, 28 Oct 2026 02:29 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 02:29 AM IST
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Religious curriculum exemption for minority institutions
देहरादून। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को लेकर सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को लागू करने से पहले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से अनुमोदन लेने की जरूरत नहीं होगी। विधानसभा सत्र के पहले दिन सरकार ने अन्य विधेयकों के साथ उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक सदन में पेश किया।
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संशोधन विधेयक में अधिनियम की धारा 12 की उपधारा तीन से उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के अनुमोदन से शब्द हटाने का प्रस्ताव किया गया है। वर्ष 2025 में बनाए गए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में प्रावधान था कि राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के अनुमोदन के बाद ही संशोधित और लागू कर सकेगा। अब प्रस्तावित संशोधन के बाद धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार करने और उसे लागू करने का अधिकार प्राधिकरण के स्तर पर ही रहेगा। इसका सीधा असर मदरसों समेत अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में लागू किए जाने वाले धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम पर पड़ेगा। दरअसल, राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया है, विभिन्न धर्म गुरुओं और जानकारों के साथ मंथन और उनकी सहमति के बाद इस पाठ्यक्रम को तैयार किया गया, लेकिन विद्यालयी शिक्षा परिषद से अनुमोदन की प्रक्रिया के चलते इसे लागू करने में अड़चन आ रही थी। अब सरकार ने इसी बाध्यता को खत्म करने के लिए अधिनियम में संशोधन का कदम उठाया है।
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कार्रवाई से पहले संस्थानों को सुनवाई का मौका
संशोधन विधेयक में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा प्रावधान भी स्पष्ट किया गया है। अधिनियम की धारा तीन की उपधारा एक के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए यदि किसी संस्थान में धार्मिक शिक्षा दी जाती है, तो प्राधिकरण दंडात्मक कार्रवाई या अर्थदंड लगाने से पहले संस्थान संचालक को सुनवाई का अवसर देगा। यानी प्राधिकरण सीधे दंड या जुर्माना लगाने के बजाय पहले संबंधित संस्थान का पक्ष सुनेगा। इसके बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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प्राधिकरण को अब धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम के लिए शिक्षा परिषद से अनुमोदन नहीं लेना होगा। इसके लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक में विद्यालयी शिक्षा परिषद से अनुमोदन की बाध्यता को खत्म करने का प्रावधान किया गया है।
- डॉ.पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
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