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रैट माइनर्स: ऑपरेशन सिलक्यारा को मकाम तक पहुंचाया, टीम के सदस्य ने कहा- कोई खानदानी काम नहीं..पढ़िए पूरी कहानी

Mon, 04 Dec 2023 12:47 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 04 Dec 2023 12:47 PM IST
सार

ऑपरेशन सिलक्यारा से पूर्व रैट माइनर्स की टीम दून में खोदाई कर चुकी है। देहरादून में घंटाघर के आसपास खोदाई करके रैट माइनर्स की टीम ने सीवर लाइन बिछाई थी।

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Rat miners team had excavated in Dehradun before Silkyara Uttarkashi Tunnel Uttarakhand
रैट माइनर्स की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑपरेशन सिलक्यारा को मकाम तक पहुंचाने वाली रैट माइनर्स की टीम इससे पहले देहरादून में भी खोदाई कर चुकी है। ये टीम खदानों के बजाए ज्यादातर सीवर का ही काम करती है। सिलक्यारा में मजदूरों के बचाव अभियान को पूरा करके देशभर में छाने वाली रैट माइनर्स की टीम के सदस्य मुन्ना कुरैशी ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि चूहे की भांति खोदाई का उनका यह कोई पुश्तैनी काम नहीं है।

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इसके बजाए उन्होंने सीवर लाइन का काम करते हुए ये काम सीखा है। बताया, कई साल पहले वे देहरादून आए थे। यहां उनकी टीम ने घंटाघर और आसपास के इलाके में सीवर लाइन बिछाने का काम इसी तकनीक से किया था। जमीन के भीतर ही भीतर खोदाई की और सीवर लाइन डाल दी। मुन्ना ने बताया कि उनका ये कोई खानदानी काम नहीं है, बल्कि सीवर और पेयजल लाइन के काम के दौरान उन्होंने ये खोदाई सीखी है।
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कभी देश की सेवा करने का मौका मिलेगा तो तत्पर रहेंगे

हालांकि, मुन्ना इस बात से भी दुखी हैं कि जो कंपनियां उन्हें सीवर लाइन का ठेका देती हैं, वे उनका पूरा भुगतान नहीं करती हैं। कई बार तो महीनों काम कराने के बाद केवल लेबर का खर्च देकर टाल देती हैं। कई बार सीवर लाइन बिछाने के बाद अगर वह थोड़ा भी ऊपर-नीचे हो गई तो भुगतान नहीं मिलता।

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मुन्ना से जब प्रदेश सरकार के 50-50 हजार रुपये के इनाम पर सवाल किया गया तो कहा, इनाम से बड़ी बात ये है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जनता ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया। कहा, जब भी कभी देश की सेवा करने का मौका मिलेगा तो उनकी निजी रॉकवेल कंपनी की टीम हमेशा तत्पर रहेगी।

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देख-देख कर सीखे काम

मुन्ना ने बताया, उन्हें किसी ने इस काम का प्रशिक्षण नहीं दिया है। उनकी पूरी टीम दूसरों के साथ काम करते-करते खुद ही खोदाई सीख गई है। उन्होंने कभी कोयला या खनिज खदानों में काम नहीं किया। उनके लिए खोदाई का मतलब सीवर लाइन को आगे बढ़ाना है।

 

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