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पोलैंड में बिखरी उत्तराखंडी संस्कृति की चमक
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 29 Mar 2014 08:09 PM IST
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पोलैंड में 16 व 23 मार्च को आयोजित हुए होली समारोह में उत्तराखंड के लोक गायक रजनीकांत सेमवाल ने अपनी संस्कृति की छटा बिखेरी। मौका था भारत पोलेंड के राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे होने का।
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पहले भी दो बार पोलैंड में अपनी प्रस्तुति दे चुके रजनीकांत सेमवाल ने इस बार होली महोत्सव में अपना प्रतिभा का जलवा बिखेरा।
वारसा और क्राको में दी प्रस्तुति
इंडो-पोलिश कल्चरल सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रजनीकांत ने पोलैंड के सांस्कृतिक शहर क्राको में 16 मार्च को और राजधानी वारसा में 23 मार्च को प्रस्तुति दी। प्रवासी भारतीय और पोलैंडवासियों ने गीतों की सुंदर प्रस्तुति को खूब सराहा।
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रजनीकांत ने होली उत्सव में गढ़वाली गीत मेरी सुनीता, टिकुलिया मामा के अलावा जौनसारी गीत अच्छी लागो, मोखे तेरी सुनाकर खूब धूम मचाई।
इसके अलावा यूरोप के पुरातन विश्वविद्यालयों में शुमार यजिलोनियन यूनिवर्सिटी में भी छात्रों के साथ उत्तराखंड के सांस्कृतिक, भौगोलिक परिस्थितियों पर एक परिचर्चा भी आयोजित की गई।
किया गया सम्मानित
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष उमेश नौटियाल ने लोक गायक रजनीकांत सेमवाल को उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार करने के लिए सम्मानित भी किया।
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पोलैंड प्रवास के दौरान गायक रजनीकांत सेमवाल ने वहां की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी यागी लोनियन के छात्र-छात्राओं को उत्तराखंड की संस्कृति तथा भौगोलिक परिदृश्य से भी अवगत कराया।
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वारसा और क्राको में दी प्रस्तुति
इंडो-पोलिश कल्चरल सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रजनीकांत ने पोलैंड के सांस्कृतिक शहर क्राको में 16 मार्च को और राजधानी वारसा में 23 मार्च को प्रस्तुति दी। प्रवासी भारतीय और पोलैंडवासियों ने गीतों की सुंदर प्रस्तुति को खूब सराहा।
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रजनीकांत ने होली उत्सव में गढ़वाली गीत मेरी सुनीता, टिकुलिया मामा के अलावा जौनसारी गीत अच्छी लागो, मोखे तेरी सुनाकर खूब धूम मचाई।
इसके अलावा यूरोप के पुरातन विश्वविद्यालयों में शुमार यजिलोनियन यूनिवर्सिटी में भी छात्रों के साथ उत्तराखंड के सांस्कृतिक, भौगोलिक परिस्थितियों पर एक परिचर्चा भी आयोजित की गई।
किया गया सम्मानित
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष उमेश नौटियाल ने लोक गायक रजनीकांत सेमवाल को उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार करने के लिए सम्मानित भी किया।
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पोलैंड प्रवास के दौरान गायक रजनीकांत सेमवाल ने वहां की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी यागी लोनियन के छात्र-छात्राओं को उत्तराखंड की संस्कृति तथा भौगोलिक परिदृश्य से भी अवगत कराया।