नेपाल त्रासदी: अनाथ बच्चों का फरिश्ता बने बाबा रामदेव
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काठमांडू में आए भीषण भूकंप से नेपाल में जो बच्चे अनाथ हो गए हैं, उनके लिए स्वामी रामदेव नेपाल में सेवाश्रम बनाएंगे।
इस कार्य को अंजाम देने के लिए आचार्य बालकृष्ण अभी नेपाल में ही रुकेंगे, जबकि शिविर लगाने गए बाबा की वापसी सोमवार को होगी। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण नेपाल में भयावह भूकंप के साक्षी बने।
काठमांडू में चल रहे उनके शिविर के तत्काल बाद प्रकृति का कहर बरपा। इसमें कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। अब उनके लिए बाबा रामदेव ने सेवाश्रम बनाने का निर्णय लिया है। इससे पहले उत्तराखंड में आई आपदा के बाद बाबा रामदेव ने रुद्रप्रयाग में भी सेवाश्रम बनाया था।
इस सेवाश्रम में रहने वाले बच्चों को पतंजलि योगपीठ गोद लेगी। इन बच्चों के पालन और शिक्षण से लेकर रोजगार दिलाने तक का जिम्मा पतंजलि उठाएगी। इसके लिए बाबा ने अपने सभी स्वयंसेवकों को मैदान में उतार दिया है। नेपाल में जितनी भी पतंजलि की इकाइयां हैं, उनसे कहा गया है कि वे राहत कार्य में जुट जाएं।
जानकारी के अनुसार स्वामी रामदेव सोमवार को दिल्ली होते हुए हरिद्वार लौटेंगे। आचार्य बालकृष्ण अभी नेपाल में रहकर राहत कार्यों में भाग लेंगे। अनाथ बच्चों के चयन और किसी एक स्थान पर सेवाश्रम बनाने का काम रविवार से ही शुरू कर दिया गया। इस कार्य में नेपाल सरकार के साथ-साथ पतंजलि की नेपाल इकाई भूमिका निभा रही है।
जिलाधिकारियों को सचेत रहने के निर्देश
रविवार को 12.40 पर उत्तराखंड के सभी जिलों में फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक प्रदेश में कहीं से भी नुकसान की सूचना नहीं है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सभी जिलाधिकारियों को दूर दराज के क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारियों को अलर्ट पर रहने को भी कहा गया है।
शनिवार के बाद रविवार को भी भूकंप के झटके प्रदेश में महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि इस बार भी भूकंप का केंद्र नेपाल में ही था। प्रदेश में चार धाम यात्रा शुरू हो चुकी है। उत्तराखंड भी भूकंप के लिहाज से जोन पांच और जोन चार में बंटा हुआ है।
पर्वतीय क्षेत्र जोन पांच में है और विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में लगातार दो दिन भूकंप के झटकों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में 13 मार्च को भूकंप को लेकर मॉक ड्रिल भी हुई थी। इस ड्रिल में यह भी पाया गया था कि अधिकतर विभागों का रिस्पांस टाइम बेहतर था।
विशेषज्ञों के मुताबिक पर्वतीय जिलों में भूकंप से भूस्खलन ट्रिगर हो सकते हैं। इससे सड़कों के साथ ही भू धंसाव की समस्या को झेल रहे गांव और अधिक खतरे में पड़ सकते हैं। कंट्रोल रूम के मुताबिक सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट जारी कर दिया गया है।