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बासमती की खुशबू ले गई ‘बारिश’
नवल किशोर यादव/ अमर उजाला, डोईवाला
Updated Fri, 01 Nov 2013 12:08 AM IST
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बारिश से धान की पौध का सीधा रिश्ता है,मगर इस बार बासमती चावल की फसल के लिए बारिश विलेन बन गई।
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पहले धान की फसल में बीमारी और फिर मानसून में विलंब का सीधा असर क्षेत्र की धान की फसल पर पड़ा है।
फसल का उत्पादन 30 से 40 फीसदी तक गिर जाने से किसान खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। देरी से जाते हुए मानसून ने बासमती समेत अन्य धान की प्रजातियों की खुशबू को भी प्रभावित किया है।
नहीं मिले उत्पादक
डोईवाला और उसके आसपास के धान उत्पादक इलाकों में इस बार धान की फसल किसानों को दगा दे रही है। किसानों को मनमाफिक उत्पादन नहीं मिल पा रहा है। डोईवाला विकास खंड का मारखमग्रांट न्याय पंचायत क्षेत्र प्रमुख रूप से धान उत्पादन के लिए जाना जाता है।
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इनमें बासमती उत्पादन के लिए दूधली, नागल बुलंदावाला, नागल ज्वालापुर, झड़ौंद, माधोवाला, बुल्लावाला, कुडकावाला, चांदमारी, तेलीवाला के अलावा माजरी, जौलीग्रांट, रानीपोखरी, बालावाला में लगभग 50 हजार बीघा से अधिक क्षेत्र में काश्तकार बासमती, कस्तूरी बासमती, पूसा-एक, पूसा-तीन और पूसा-छह के अतिरिक्त धान की तारावड़ी और 1149 नामक प्रजाति का धान बोने में रुचि रखते हैं।
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लगा रोग
इस बार फसल के शुरूआती दौर में ही धान में ब्लास्ट नामक रोग लग गया है। किसी तरह उसे संभाला तो आपदा आ गई और इसके बाद मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की मेहनत को पलीता लगा दिया। जिस धान की फसल के लिए शुरूआत में पानी संजीवनी है, वही बाद में दुश्मन बन गया। मानसून के विलंब से जाने से धान की फसल में गिरावट दर्ज की जा रही है। लगातार बारिश ने तैयार फसल पर प्रभाव डाला है।
समस्या किसानों की जुबानी
लगातार बारिश से धान के पौधे में पूरे कल्ले नहीं बन पाए, जिससे उत्पादन पर प्रभाव पड़ना लाजिमी है। ब्लास्ट रोग पर कंट्रोल होने के बाद बारिश की अधिकता का प्रकोप किसानों को झेलना पड़ा है। धान की जो पैदावार आनी चाहिए थी, वह नहीं मिल पा रही है।
सरदार रणजोध सिंह, झबरावाला
धान की फसल में किसान को अत्याधिक परिश्रम करना पड़ता है। इस बार मानसून की बारिश अक्तूबर तक रही है, जिसने तैयार फसल को व्यापक क्षति पहुंचाई है। प्रति बीघा उत्पादन कम आ रहा है।
हाजी अमीर हसन, तेलीवाला
अत्यधिक वृष्टि से धान की फसल गिर गई थी। फिर लगातार बारिश हुई तो पौधा उठ नहीं पाया। नतीजा उत्पादन कम हुआ। धान उत्पादक किसान इस बार के उत्पादन से नुकसान की स्थिति में हैं। फसल का जो अनुमान था वह नहीं मिला है।
जोगेंद्र प्रसाद गुप्ता, नागल बुलंदावाला
दलहनी फसलों को भी हुई क्षति
प्रखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में दलहनी फसलों के लिए भी अधिक बारिश अभिशाप बनकर आई है। डोईवाला के भोगपुर, इठारना आदि पर्वतीय गांवों में दलहनी फसलें जैसे उड़द, कुलथ और लेाबिया का भी पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाया है, जिसका कारण मानसून की अधिक बारिश है।