उमा से खफा पुरोहित समाज, तीर्थ स्थानों पर बहिष्कार!
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केंद्रीय मंत्री उमा भारती से हरिद्वार ही नहीं, देशभर का पुरोहित समाज नाराज है। कईं संगठन तीर्थों पर इनके बहिष्कार की योजना बना रहे हैं। अस्थि प्रवाह पर पुरोहितों की बजाय साधु-संतों से राय लेने की बात कहकर उमा ने आग में घी डालने का काम किया है।
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि उमा भारती को संत होते हुए भी धार्मिक परंपराओं का ज्ञान नहीं है। उमा ने काशी में बैठक की लेकिन वहां के पुरोहितों से राय लेने के बजाय साधु-संतों से राय लेने की बात कह डाली।
गंगा सभा के महामंत्री विरेंद्र श्रीकुंज ने कहा कि उमा भारती को पहले अस्थि प्रवाह का महत्व और इतिहास समझ लेना चाहिए। अस्थि प्रवाह के क्षेत्र में संतों का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कर्मकांड से जुडे़ पुरोहित पंडित शिवकुमार शर्मा शास्त्री, पंडित हरिओम जयवाल शास्त्री, पंडित कृष्णकुमार शास्त्री, पंडित उमाशंकर जोशी, गंगा सभा विद्वत परिषद के सचिव पंडित संजीव शास्त्री, धर्म ग्रंथों एवं कर्मकांड के विद्वान पंडित इंद्रकुमार मिश्र आदि ने उमा के बयान को गलत बताया।
क्या है नाराजगी का कारण?
विश्व हिंदु परिषद के प्रांतीय संयोेजक वीरेंद्र कीर्तिपाल ने पुरोहितों की बजाय संतों की राय पर आपत्ति जताई है। कीर्तिपाल ने कहा कि अस्थि प्रवाह का प्रत्येक सवाल तीर्थ यात्रियों और पंडों से जुड़ा हुआ है। अस्थि प्रवाह कहां करना है, इसका निर्णय पुरोहित करेंगे।
अस्थि प्रवाह पर करेंगे बहिष्कार
हरिद्वार। अभा युवा पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उज्ज्वल पंडित ने कहा कि अस्थि प्रवाह के संबंध में कोई भी निर्णय तीर्थ पुरोहित समाज करेगा। यदि संतों की राय पर उमा चली तो सभी तीर्थों पर उमा भारती का बहिष्कार किया जाएगा।
उमा भारती ने पहले गंगा किनारे संतों के शव प्रवाह का विरोध किया। फिर गंगा किनारे के श्मशान घाट हटाने का बयान दिया। उनका तीसरा बयान अब यह आया है कि गंगा किनारे के घाटों पर अस्थि प्रवाह नहीं किया जा सकता। गंगा से जुड़े ऐसे बयानों से तीर्थ पुरोहित समाज खफा है। संन्यासियों का शव प्रवाह रोकने की बात अखाड़ा परिषद को नागवार गुजरी है। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि सहित कई संत भूमि समाधि के लिए भूमि दिए बिना इसे स्वीकार न करने की बात कह चुके हैं।