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Dehradun News: मानसिक रोग विभाग में संसाधनों की कमी से परेशानी
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IIदून अस्पताल में पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से हर रोज करीब 1500 से दो हजार मरीज उपचार के लिए आते हैं। मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में भी हर रोज 30 से भी अधिक मरीज पहुंचते हैं। चूंकि मानसिक रोग विभाग में अभी संसाधनों की कमी है, ऐसे में मरीजों को संपूर्ण उपचार मिलने में परेशानी हो रही है। ठंड के जब ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ती है, तो परेशानी और बढ़ जाती है। चिकित्सकों के मुताबिक अवसाद समेत कई तरह के मानसिक विकारों से पीड़ित मरीज हर सीजन में देखने को मिलते हैं। शीत ऋतु में परेशानी और बढ़ जाती है। अस्पताल में इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरेपी और आईक्यू जांचने की मशीन नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को इन जांचों के लिए बाहर के निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है।
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Iअस्पताल के मानसिक रोग विभाग में इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरेपी और आईक्यू जांचने की मशीन को स्थापित करने की कवायद चल रही है। इन मशीनों को जल्द स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कई संसाधन भी बढ़ाए जाएंगे। मरीजों को कोई भी परेशानी न हो इस दिशा में काम किया जा रहा है। -डॉ. आरएस बिष्ट,
चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पतालI
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IIदून अस्पताल में पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से हर रोज करीब 1500 से दो हजार मरीज उपचार के लिए आते हैं। मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में भी हर रोज 30 से भी अधिक मरीज पहुंचते हैं। चूंकि मानसिक रोग विभाग में अभी संसाधनों की कमी है, ऐसे में मरीजों को संपूर्ण उपचार मिलने में परेशानी हो रही है। ठंड के जब ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ती है, तो परेशानी और बढ़ जाती है। चिकित्सकों के मुताबिक अवसाद समेत कई तरह के मानसिक विकारों से पीड़ित मरीज हर सीजन में देखने को मिलते हैं। शीत ऋतु में परेशानी और बढ़ जाती है। अस्पताल में इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरेपी और आईक्यू जांचने की मशीन नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को इन जांचों के लिए बाहर के निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है।
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Iअस्पताल के मानसिक रोग विभाग में इलेक्ट्रोकंवल्सिव थेरेपी और आईक्यू जांचने की मशीन को स्थापित करने की कवायद चल रही है। इन मशीनों को जल्द स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कई संसाधन भी बढ़ाए जाएंगे। मरीजों को कोई भी परेशानी न हो इस दिशा में काम किया जा रहा है। -डॉ. आरएस बिष्ट,
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चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पतालI