{"_id":"69ebddd8ac35f158d7054678","slug":"private-schools-accused-of-charging-arbitrary-bus-fares-dehradun-news-c-5-1-drn1031-954834-2026-04-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: निजी स्कूलों पर मनमाना बस किराया वसूली का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: निजी स्कूलों पर मनमाना बस किराया वसूली का आरोप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य में निजी स्कूल बस और वैन किराए में कथित अनियमितताओं के लिए अभिभावकों में रोष बढ़ता जा रहा है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड परिवहन विभाग की ओर से निर्धारित दरों के बावजूद स्कूल प्रशासन मनमाने तरीके से ज्यादा शुल्क वसूल रहा है।
विभाग ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर स्कूल बस और वैन किराए की दरें तय की थीं। इसके तहत एक से 10 किमी तक 2200 रुपये प्रति माह, 10 से 20 किमी तक 2700 रुपये, 20 से 30 किमी तक 3200 रुपये और 30 किमी से अधिक दूरी के लिए 3700 रुपये प्रति माह निर्धारित किए गए थे। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल इन निर्धारित दरों का पालन नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि एक से तीन किमी के लिए लगभग 3000 रुपये, तीन से छह किमी के लिए 3800 रुपये, छह से 10 किमी के लिए 4200 रुपये और 10 किमी से अधिक दूरी के लिए इससे भी अधिक शुल्क लिया जा रहा है जो तय मानकों से काफी ज्यादा है।
अभिभावकों ने यह भी बताया कि स्कूल बसों और वैन का संचालन साल में केवल 160 से 180 दिनों तक ही होता है जबकि शुल्क पूरे साल का लिया जाता है। इसके अलावा ट्यूशन फीस के साथ कंप्यूटर लैब, परीक्षा शुल्क, लैब चार्ज, स्टूडेंट वेलफेयर, जर्नल और लेट फीस जैसे विभिन्न मदों में अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जा रहा है जो मिलाकर हर महीने करीब 2000 रुपये या उससे ज्यादा हो जाता है। इसपर स्कूल प्रशासन का कहना है कि उन्हें अभी तक परिवहन विभाग का आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है और आदेश मिलने के बाद ही आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। अभिभावकों का यह भी आरोप है कि पहले से जारी आदेशों का पालन भी सत्र शुरू होने के कई महीनों बाद किया गया था। अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन सरकारी आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विभाग ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर स्कूल बस और वैन किराए की दरें तय की थीं। इसके तहत एक से 10 किमी तक 2200 रुपये प्रति माह, 10 से 20 किमी तक 2700 रुपये, 20 से 30 किमी तक 3200 रुपये और 30 किमी से अधिक दूरी के लिए 3700 रुपये प्रति माह निर्धारित किए गए थे। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल इन निर्धारित दरों का पालन नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि एक से तीन किमी के लिए लगभग 3000 रुपये, तीन से छह किमी के लिए 3800 रुपये, छह से 10 किमी के लिए 4200 रुपये और 10 किमी से अधिक दूरी के लिए इससे भी अधिक शुल्क लिया जा रहा है जो तय मानकों से काफी ज्यादा है।
विज्ञापन
अभिभावकों ने यह भी बताया कि स्कूल बसों और वैन का संचालन साल में केवल 160 से 180 दिनों तक ही होता है जबकि शुल्क पूरे साल का लिया जाता है। इसके अलावा ट्यूशन फीस के साथ कंप्यूटर लैब, परीक्षा शुल्क, लैब चार्ज, स्टूडेंट वेलफेयर, जर्नल और लेट फीस जैसे विभिन्न मदों में अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जा रहा है जो मिलाकर हर महीने करीब 2000 रुपये या उससे ज्यादा हो जाता है। इसपर स्कूल प्रशासन का कहना है कि उन्हें अभी तक परिवहन विभाग का आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है और आदेश मिलने के बाद ही आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। अभिभावकों का यह भी आरोप है कि पहले से जारी आदेशों का पालन भी सत्र शुरू होने के कई महीनों बाद किया गया था। अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन सरकारी आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।
विज्ञापन