'राष्ट्रपति का उत्तराखंड आना सौभाग्य की बात'
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सोमवार को दोपहर लगभग 1 बजकर 20 मिनट पर देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। जहां उत्तराखंड के राज्यपाल केके पॉल और मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उनका स्वागत किया।
जहां से राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ जीटीसी हेलीपैड से चॉपर पर बैठकर राजभवन पहुंचे। राष्ट्रपति का दिन का भोज राजभवन में ही हुआ और इसके बाद लगभग 3.38 बजे राष्ट्रपति विधानसभा के लिए रवाना हुए।
राष्ट्रपति के उत्तराखंड विधानसभा में पहुंचने के बाद सोमवार शाम चार बजे से संबोधन शुरू हुआ। जिसमें विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने सदन में पहली बार आने पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को धन्यवाद कहा।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने भी सदन को संबोधित किया। और राष्ट्रपति से उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटक स्थलों पर एक बार जरूर आने की आग्रह किया। इसके बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सदन को संबोधित किया।
उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई। इस दौरान राज्यपाल केके पॉल ने कहा कि राष्ट्रपति का उत्तराखंड आना सौभाग्य की बात है। अपने संबोधन के बाद शाम सवा पांच बजे राष्ट्रपति राजभवन पहुंचेंगे। उत्तराखंड की लोक गायिका बसंती बिष्ट द्वारा ईस्ट वंदना प्रस्तुत की जाएगी।
इसके बाद सात बजे तक आमंत्रित अतिथियों से मिलेंगे। इसके बाद अतिथियों के साथ सायं 7.0 से 7.30 तक राजभवन के प्रेक्षागृह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का लुत्फ उठाएंगे। राष्ट्रपति का रात्रि विश्राम राजभवन में होगा।
19 मई को सुबह पौने ग्यारह बजे राष्ट्रपति द्वारा राजभवन के हरित प्रांगण में वृक्षारोपण होगा। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 11.00 बजे राष्ट्रपति जीटीसी हेलीपैड के लिए प्रस्थान करेंगे।
परोसी जाएगी झंगोरे की खीर
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के आगमन पर राजभवन में उनके भोजन का खास ख्याल रखा गया है। परंपरागत व्यंजनों के साथ ही स्थानीय उत्पादों से बना भोजन महामहिम को परोसा जाएगा।
खासतौर पर झंगोरे की खीर स्पेशल डिस के तौर पर तैयार होगी। राजमा भी हर्षिल से मंगाया गया है। इसके अलावा मकई पालक, पनीर, कढ़ी पकौड़ी, कद्दू की सब्जी भी महामहिम के भोजन में शामिल है।
इस बार गार्ड ऑफ ऑनर नहीं
राष्ट्रपति को इस बार गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा। क्योंकि यह परंपरा किसी भी राज्य में पहले भ्रमण के समय ही होती है। चूंकि प्रणव मुखर्जी का राष्ट्रपति बनने के बाद यह तीसरा दौरा है, इसलिए इस बार गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा।
बतौर राष्ट्रपति चौथी विधानसभा को करेंगे संबोधित
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 29 अक्टूबर 2012 को केरल विधानसभा को भी संबोधित किया। केरल में उस वक्त राज्य विधानसभा का सत्र चल रहा था। इसके बाद 21 अक्टूबर 2013 को प्रणब ने मेघालय की विधानसभा को संबोधित किया।
जनवरी 2013 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के 125 साल पूरे होने के अवसर पर उन्होंने बतौर राष्ट्रपति दोनों सदनों (विधानसभा व विधान परिषद) को संबोधित किया था। लेकिन यह पहला मौका है कि जब राज्य सरकार के आग्रह पर बगैर किसी मौके के राष्ट्रपति उत्तराखंड विधानसभा को संबधित करने आ रहे हैं। विधानसभा का सत्र केवल राष्ट्रपति के संबोधन के लिए ही बुलाया गया है।
राष्ट्रपतियों के उत्तराखंड दौरे
एपीजे अब्दुल कलाम : वर्ष 2002 में देहरादून आए और दून स्कूल के स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया। इसी दिन वह देहरादून से अल्मोड़ा के लिए रवाना हुए।
प्रतिभा देवी सिंह पाटिल : अक्टूबर 2010 व 10-11 जून 2011 को दो बार परिवार के साथ देहरादून आई थी।
प्रणव मुखर्जी : 09 दिसम्बर 2012 को हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इसके बाद 2013 में लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी मसूरी में लेक्चर के लिए आए और अब 18 मई 2015 को देहरादून आकर विधानसभा को संबोधित करेंगे।
राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक होने के नाते देश के सबसे बड़ी हस्ती होते हैं। भाजपा विधानमंडल दल उसी तरह से उनका स्वागत करेगा। लेकिन इतना आग्रह जरूर करेंगे कि वे राज्य की कांग्रेस सरकार को प्रजातांत्रिक मूल्यों को अपनाने के लिए कहें। मुझे बोलने के लिए पांच मिनट का समय मिला है, जितनी हो सकेगी अपनी बात रखेंगे।
- अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष
...ताकि न हो सफर में व्यवधान
महामहिम के दौरे को देखते हुए वन विभाग ने जीटीसी हेलीपैड से राजभवन के बीच ऐसे दर्जनों पेड़ काट दिए गए, जिनके तेज हवा या किसी और वजह से गिरने का खतरा था। यह सब राष्ट्रपति की सुरक्षा की दृष्टि से किया गया है।