दून महिला अस्पताल में फर्श पर डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा की मौत पर मर गईं संवेदनाएं
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दून महिला अस्पताल में प्रसूता और नवजात की मौत को पूरे सरकारी सिस्टम ने ‘बेड का मामला’ बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या प्रसूता और नवजात की मौत चंद मिनटों में ही हो गई? हाकिमों ने तो अपनी नौकरी बेड देने की बात कहकर बचा ली लेकिन प्रसूता की फर्श पर डिलीवरी और नवजात की मौत पूरे सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। हैरत की बात यह है कि इस सवाल पर कोई न तो सोचने को तैयार है और न ही जांच कराने को राजी।
दून महिला अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के बाद अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी अफसरों की भाषा बोलते हुए प्रसूता को अस्पताल में बेड मुहैया कराने की बात कही है। जबकि मुद्दा बेड का नहीं बल्कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी महिला अस्पताल में गर्भवती को फर्श पर प्रसव होने और प्रसव उपरांत जच्चा-बच्चा की दर्दनाक मौत होने का है। जिससे हर जिम्मेदार पल्ला झाड़ रहा है। घटना के उजागर होने के बाद से अस्पताल प्रबंधन ने अपने बचाव में कहा कि प्रसूता बार-बार बेड से उतरकर बाहर निकल रही थी।
जब प्रसूता अंतिम बार बेड से उतरकर बाहर चली गई तो अस्पताल के फर्श पर ही उसका प्रसव हो गया। तो सवाल उठता है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, स्टाफ नर्स क्या कर रही थी? उन्होंने इतनी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती मरीज पर नजर क्यों नहीं रखी? चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मात्र चंद मिनटों में ही प्रसव नहीं होता। इससे पूर्व उसे गंभीर प्रसव दर्द हुआ होगा। जाहिर तौर पर उसने या परिजनों ने इसकी शिकायत ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों व स्टाफ नर्स को की होगी। लेकिन, किसी ने परिजनों के अनुरोध को गंभीरता से नहीं लिया। अगर प्रसूता की बीमारी को गंभीरता से लिया गया होता तो दर्दनाक घटना होने से बच सकती थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि प्रसूता को समय रहते उचित इलाज किया गया होता तो प्रसव के बाद न सिर्फ प्रसूता वरन नवजात की भी जिंदगी बचाई जा सकती थी।
...तो क्यों नहीं की सर्जरी
दून महिला अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रसूता के हीमोग्लोबिन को चार ग्राम बताकर इसे उसकी मौत की बड़ी वजह बताया है लेकिन यहां सवाल उठ रहा है कि अगर हीमोग्लोबिन इतना कम था तो समय रहते प्रसूता की सर्जरी क्यों नहीं की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि उस महिला को खून चढ़ाकर हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाया जा सकता था।
राजभवन पहुंचा जच्चा-बच्चा की मौत का मामला
दून महिला अस्पताल में फर्श पर प्रसव होने और उसके बाद प्रसूता व नवजात की मौत का मामला राजभवन पहुंच गया है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने शनिवार को सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण नितेश कुमार झा को तलब कर महिला अस्पताल समेत राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली।
इस दौरान सचिव को निर्देशित किया कि वह राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों की नियमित मॉनीटरिंग की व्यवस्था करें, ताकि महिला अस्पताल में हुई घटना जैसी पुनरावृत्ति किसी भी अस्पताल में न हो। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में खासकर महिला रोगियों और गर्भवती महिलाओं के लिए इलाज की हरसंभव व्यवस्था की जाए। सचिव चिकित्सा नितेश कुमार झा ने बताया कि अस्पतालों में लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं। एक साल में चिकित्सा व स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार आया है। राज्य में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी दर्ज हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए और कदम उठाए जाएंगे।
कांग्रेसियों ने स्वास्थ्य निदेशालय में किया प्रदर्शन
दो दिन पूर्व दून महिला अस्पताल में फर्श पर प्रसव होने और जच्चा-बच्चा की मौत प्रकरण को लेकर सियासत गरमाने लग गई है। घटना के विरोध में उत्तराखंड क्रांति दल के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने दून महिला अस्पताल में प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार का पुतला फूंका। जबकि कांग्रेसियों ने स्वास्थ्य निदेशालय में प्रदर्शन कर अधिकारियों का घेराव कर दून अस्पताल को नए सिरे से जिला अस्पताल बनाने की मांग की।
शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना की अगुवाई में कई पार्टी कार्यकर्ता स्वास्थ्य निदेशालय पहुंचे और प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर अस्पतालों में व्यवस्था नहीं सुधारने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि राजधानी के सबसे बड़े सरकारी महिला अस्पताल की यह स्थिति है तो राज्य के पर्वतीय इलाकों के अस्पतालों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टरों, स्टाफ नर्स की लापरवाही के चलते प्रसूता का फर्श पर प्रसव होना और इसके बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो जाना बेहद शर्मनाक है।
इस दौरान गुस्साए कांग्रेसियों ने स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. टीसी पंत से मुलाकात करनी चाही, लेकिन उनके बाहर होने की वजह से अपर निदेशक सुमन आर्य का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने मांग उठाई कि दून अस्पताल को नए सिरे से जिला अस्पताल बनाया जाए और मेडिकल कॉलेज के लिए उनके ही परिसर में अलग से अस्पताल की व्यवस्था की जाए। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि जब से दून अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाया गया है, तब से अव्यवस्थाएं हावी हैं, जिसका खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। प्रदर्शन में महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, महिला जिला अध्यक्ष कमलेश रमन, मीना रावत, रीना सिंघल, महेश जोशी, देविका रानी राठौर, एसपी बहुगुणा, चंद्रकला नेगी, राजेश चमोली, सुरेश ध्यानी, त्रिवेंद्र बुटोला, सुमित राठौर आदि कांग्रेस शामिल हुए।
अस्पताल के गेट पर सीएम का पुतला जलाकर इस्तीफे की मांग की
जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में शनिवार को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ उक्रांद कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। दल की महिला प्रकोष्ठ की केंद्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ता महिला अस्पताल पहुंची और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ महिलाएं तो लाठी-डंडे लेकर अस्पताल पहुंची थीं। समय रहते गार्ड और प्रबंधन उन्हें न रोकते तो हालात हिंसक हो सकते थे। करीब दो घंटे तक हंगामा होता रहा। इसके बाद उन्होंने अस्पताल के गेट पर प्रदेश सरकार का पुतला जलाकर मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।
शनिवार को उत्तराखंड क्रांति दल महिला प्रकोष्ठ की केंद्रीय अध्यक्ष रामेश्वरी चौहान के नेतृत्व में कार्यालय में एकत्रित हुई और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दून महिला चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर पहुंचीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लाठी-डंडे लेकर पहुंचीं कार्यकर्ताओं को गार्ड और प्रबंधन ने रोक लिया। इससे वहां करीब दो घंटे तक हंगामा होता रहा। इस दौरान कर्मचारियों से उनकी तीखी नोक-झोंक भी हुई। इसके बाद उन्होंने अस्पताल के मुख्य गेट पर मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर इस्तीफे की मांग की। रामेश्वरी चौहान ने कहा कि दून चिकित्सालय में चिकित्सकों व स्टाफ नर्स की लापरवाही के कारण मरीजों की मौत होना आम बात हो चुकी है। जब राजधानी में यह हाल है तो पूरे प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्थाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को चिकित्सा सचिव नितेश झा ने जच्चा-बच्चा की मौत के प्रकरण में कमेटी गठित कर 15 दिन में जांच रिपोर्ट देने की बात कही थी और शाम को स्वयं ही अस्पताल को क्लीनचिट देते हुए फैसला सुना दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि अस्पतालों की दुर्दशा सरकार के संरक्षण में हो रही है। सरकार अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाहियों पर पर्दा डालने का काम कर रही है। प्रदर्शन में राजेश्वरी रावत, सविता राई, लक्ष्मी भट्ट, ज्योति शाह, सरिता थापा, रितु थापा, दीपू देवी, सुनीता सिंह, शर्मिला नेगी, जसोदा काला समेत कई कार्यकर्ता शामिल थीं।
आप ने दोषियों के खिलाफ की कार्रवाई की मांग
जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य निदेशालय में अधिकारियों से मुलाकात की। प्रदेश संगठन मंत्री उमा सिसौदिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कहा कि अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार व स्वास्थ्य निदेशालय जिम्मेदार है। पांच दिनों तक पीड़िता को बेड तक नहीं दिया गया। कार्यकर्ताओं ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। इस दौरान कुलदीप सहदेव, अशोक सेमवाल, विनोद बजाज, वीरेंद्र पोखरियाल, बलविंदर सैनी, धर्मेंद्र ठाकुर, शिखा गुप्ता, शैलेश तिवारी, विनोद पंत, कमल राणा उपस्थित रहे। ब्यूरो
आक्रोशित स्टाफ नर्स, कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार
दून महिला अस्पताल में उक्रांद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के धरना प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए स्टाफ नर्स, कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया। जिससे अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रकरण की जानकारी मिलने पर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता और दून अस्पताल के सीएमएस मौके पर पहुंचे।
उन्होंने आक्रोशित स्टाफ नर्स व कर्मचारियाें को समझाकर कार्य बहिष्कार समाप्त कराया। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता के साथ बैठक के दौरान स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारियों ने कहा कि वे अस्पताल में भर्ती मरीजों की दिन रात सेवा करते हैं। ऐसे में उन पर मरीजों की प्रताड़ना का आरोप लगाना सरासर गलत हैं। उन्होंने उक्रांद पदाधिकारियोें और कार्यकर्ताओं पर गाली गलौज करने व अभद्रता का आरोप लगाया। इस दौरान अस्पताल में मरीजों-तीमारदारों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। डॉ. गुप्ता का कहना है कि अभद्रता की जांच कराई जाएगी। इसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करना और इलाज में व्यवधान डालने को जायज नहीं ठहराया जा सकता है।
गांधी शताब्दी अस्पताल में खाली पड़े बेड, दून महिला में मारामारी
गांधी शताब्दी अस्पताल में बेड खाली पड़े हैं जबकि दून महिला अस्पताल में मरीजों की मारामारी है। दून महिला अस्पताल में प्रसूता और बच्चे की मौत के बाद सरकारी मशीनरी की हरकत के तहत शनिवार को अपर सचिव स्वास्थ्य किशोर पंत ने गांधी शताब्दी अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहां गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी भी ली।
अपर सचिव स्वास्थ्य किशोर पंत ने गांधी शताब्दी अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड केयर विंग का जायजा लिया। अस्पताल में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञों के अलावा अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों और सुविधाओं की जानकारी ली। अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने अपर सचिव को बताया कि अस्पताल में 167 बेड की सुविधा है। जिसमें से 54 नेत्ररोगियों के लिए आरक्षित है। जबकि 113 बेड गर्भवती महिलाओं व बच्चों के सुरक्षित हैं। अस्पताल में छह स्त्री रोग विशेषज्ञों के अलावा रेडियोलॉजिस्ट, बालरोग विशेषज्ञ, एनेस्थेसिस्ट विशेषज्ञों की तैनाती की गई है। अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं को उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित तमाम कल्याणकारी योजनाओं की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। अपर सचिव स्वास्थ्य के निरीक्षण के समय सीएमओ डॉ. एसके गुप्ता, समेत तमाम अधिकारी उपस्थित थे।