फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   power cut in uttarakhand

बिजली के झटकों से कराह रहा है उत्तराखंड

Sun, 31 Aug 2014 03:07 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 31 Aug 2014 03:07 PM IST
विज्ञापन
power cut in uttarakhand

बिजलीघरों में उत्पादन धराशायी होने से उत्तराखंड में इन दिनों बिजली के लिए हाय-हाय मची है।

विज्ञापन


रोजमर्रा के कामकाज अटके
रोजाना घंटों तक बिजली कटौती के कारण गांव, शहर के साथ उद्योग भी कराह रहे हैं। कटौती से इंडस्ट्री को जहां भारी नुकसान हो रहा है, वहीं घरों में रोजमर्रा के कामकाज अटकने लगे हैं।

नदियों में आई सिल्ट से राज्य के बिजलीघरों की हालत खस्ता है, जबकि केंद्रीय बिजलीघरों की मांग दूसरे राज्यों में सूखा आदि पड़ने से पूरी नहीं हो रही है।

उत्तराखंड जल विद्युत निगम के कालागढ़ पावर हाउस से तीन हफ्ते से अधिक वक्त से उत्पादन नहीं मिल सका है। मनेरी भाली-प्रथम से 30 मेगावाट, मनेरी भाली-द्वितीय से 272 मेगावाट और छिबरो से सिर्फ 120 मेगावाट बिजली मिल रही है।
विज्ञापन


केंद्रीय पूल से शनिवार को 1,60,000 यूनिट की अपेक्षा 1,30,70000 यूनिट ही बिजली मिली। राज्य पोषित जल विद्युत गृहों से 1,74,90000 यूनिट उत्पादन हुआ। राज्य विद्युत गृहों, केंद्रीय सेक्टर और दूसरे स्रोतों से कुल 1,50,50000 यूनिट बिजली मिल पाई। जबकि राज्य की मांग 3,75,30000 यूनिट रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


कम उत्पादन को देखते हुए रविवार के लिए 25 लाख यूनिट बिजली खरीद ली गई है।
- मधुसूदन, प्रवक्ता, ऊर्जा निगम

ऊर्जा निगम लगातार उद्योगों में घंटों बिजली कटौती कर रहा है। ऐसे में राज्य के उद्योगों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
- अनिल मारवाह, महासचिव, प्रांतीय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

कहां कितनी बिजली कटौती
हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र- चार घंटे
ऊधमसिंहनगर के ग्रामीण क्षेत्र- चार घंटे
गढ़वाल मंडल के छोटे शहर- ढाई घंटे
कुमाऊं के छोटे शहर- ढाई घंटे
काशीपुर, रुद्रपुर, रुड़की और हल्द्वानी शहर- दो घंटे
नान कंटीनियस इंडस्ट्री सिडकुल- ढाई घंटे
नान कंटीनियस इंडस्ट्री पंतनगर- ढाई घंटे
नान कंटीनियस इंडस्ट्री हरिद्वार- ढाई घंटे
नान कंटीनियस इंडस्ट्री कुमाऊं - ढाई घंटे
नान कंटीनियस इंडस्ट्री गढ़वाल- ढाई घंटे

कटौती से हो रहा नुकसान
 
एक्सपोर्ट माल वक्त पर सप्लाई न हो पाने पर ऑर्डर कैंसिल हो जाते हैं।
बिजली न होने पर लेबर खाली रहते हैं। वक्त, मजदूरी दोनों जाया होती है।
जेनरेटर आदि से कारखाना चलाने पर उत्पादन लागत कई गुना बढ़ जाती है।
घंटों कटौती से प्लांटों में हीटिंग प्लांट आदि को काफी नुकसान होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed