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दामन पर खून के दाग से खुद को बचा नहीं पाई खाकी

Fri, 06 Jun 2014 10:49 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 06 Jun 2014 10:49 PM IST
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police image destroyed in ranbir encounter

रणवीर एनकाउंटर में खाकी की साख दांव पर लगी थी। इसे बचाने के लिए हर हथकंडा अपनाया गया, लेकिन रणबीर के पिता की दोषियों को सजा दिलाने के दृढ संकल्प ने उनके हर प्रयास पर पानी फेर दिया।

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प्रदेश भर की पुलिस ने एकजुटता दिखाते हुए कानूनी लड़ाई के नाम पर चंदा देने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। यह बात अलग है कि विभाग फंसे पुलिसकर्मियों को बचाने में नाकाम रहा।
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3 जुलाई 2009 को हुए रणबीर एनकाउंटर के बाद से उत्तराखंड पुलिस बैक फुट पर हैं। मुठभेड़ में 18 पुलिसकर्मियों के फंसने से पूरा विभाग को बड़ा झटका लगा था।

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दोषियों को बचाने के ल‌िए इकठ्ठा हुआ था धन

police image destroyed in ranbir encounter

दोषी करार दिए जाने के बाद पूरे विभाग में छटपटाहट स्वाभाविक है। वैसे तो इन पुलिसकर्मियों को बचाने को प्रयासों में कमी नहीं रही। पीड़ित परिवार को गाहे-बगाहे दबाव बनाने के साथ आर्थिक लिहाज से भी कहानी को अपने पक्ष में लाने की जी तोड़ कोशिश हुई।

पहले तो पुलिस का रवैया मनमाना था, लेकिन जैसे-जैसे कार्रवाई बढ़ती गई तो पुलिस की रंगत भी उड़ती चली गई। बावजूद इसके रणबीर एनकाउंटर में पुलिस की एकजुटता किसी से छिपी नहीं है।

सूत्रों की माने तो विभागीय स्तर पर धन संग्रह भी हुआ। यह धन कैसे खर्च हुआ, इसका किसी को पता नहीं है। हालांकि अधिकारिक तौर पर चंदा वसूली की बात को नकारा जाता रहा है।

रणबीर के जीजा ने बताया बड़ा फैसला

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सीबीआई की विशेष अदालत में आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के दौरान मृतक रणबीर के पिता रविन्द्र पाल सिंह, भाई संदीप और जीजा सुधीर के अलावा अन्य परिजन भी थे।

जीजा सुधीर ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि रणबीर की हत्या की भरपाई तो नहीं की जा सकती है, लेकिन उन्हें संतोष है कि कोर्ट ने पांच साल की सुनवाई के बाद शुक्रवार को उन्हें दोषी करार दिया है।

यह लड़ाई केवल रणबीर की मौत को लेकर नहीं लड़ी गई। पूरे परिवार की मंशा यह थी कि भविष्य में कोई बेकसूर शख्स फर्जी मुठभेड़ में न मारा जाए।

‘अपने अंजाम की फिक्र करे पुलिस’

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अपने जवान बेटे की हत्या से आहत पिता रविन्द्र पाल सिंह को मानसिक रूप से तोड़ने की भी कोशिश की गई थी। सिंह को पुलिस द्वारा आतंकित किए जाने का भी लगा था।

उस समय रविन्द्र पाल सिंह ने पुलिसकर्मियों को नसीहत दी थी कि वह उनकी छोड़कर अपने अंजाम की फिक्र करें। उन्होंने कहा था बेशक वह बर्बाद हो जाएं, लेकिन उन्हें सजा दिलाकर रहेंगे।

जो कहा पूरा किया
शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला आया तो उनकी हर बात सही साबित हुई। पांच साल लंबी इस लड़ाई में रणबीर के परिवार के जज्बे में कोई कमी नहीं आई।

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