शराब कांड: अब तक 35 लोग गवा चुके जान, 60 को गंभीर हालत में एम्स किया रेफर
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सिविल अस्पताल में शनिवार को भी शवों को लाने और ले जाने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मृतकों के परिजनों की भारी भीड़ लगी रही। हर कोई अपनों पोस्टमार्टम होने के बाद शव गांव ले जाने का इंतजार करता रहा। लोगों की भीड़ को देखते हुए सिविल अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
शुक्रवार की तरह शनिवार को भी सिविल अस्पताल में बिंडूखड़क, भलस्वागाज, मानकपुर आदमपुर, बाल्लुपुर गांव से शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए सिविल अस्पताल लाने और ले जाने का सिलसिला जारी रहा। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े लोगों के चेहरे पर अपनों को खोने का गम दिख रहा था। हर कोई सरकारी मशीनरी को कोस रहा था।
ग्रामीणों का कहना था कि यदि आबकारी विभाग और पुलिस अवैध और कच्ची शराब पर सख्ती से कार्रवाई करती तो आज यह दिन न देखना पड़ता। दिनभर बीमार व्यक्तियों को सिविल अस्पताल लाने का सिलसिला जारी रहा। शनिवार को 60 सेे अधिक लोगों को सिविल अस्पताल लाया गया। जहां से 65 को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया।
इनको एम्स ऋषिकेश किया रेफर
राकेश, राजपाल, जसपाल, नेकीराम, तेजपाल, रामनाथ, मामपाल, विनोद, जसविंदर, मोनू, जितेंद्र, बोबी, राजकुमार, गोपी, धर्मेश कुमार, कुशलपाल, राजू, प्रदीप, फूल कुमार, धूम सिंह, बबलू, अशोक, स्वराज, विक्रम, पप्पू, अरविंद, रविकुमार, बबलू, सोनू, राज, अंकित, बबलू, बालेंद्र, सोनू, सुशील, सोनू, नरेश कुमार, श्याम, संजय, पवन सिंह, नसीम, अमरजीत, विकास, अंकित, ऋषिपाल, महावीर, मेहर सिंह, राजकुमार, धनपाल, बाली, जनेश्वर, नभेराम, सुनील, मित्रासैनी, अंकित, नरेश, हरिसिंह, बाबूराम, सोमदत्त, धीेर सिंह, दिलशाद, राजपाल, सुनील, रॉकी आदि।
रेफर करने के दौरान युवक का हंगामा
शनिवार सुबह झबरेड़ा के एक गांव से एक युवक को नशे की हालत में सिविल अस्पताल में लाकर भर्ती कराया गया था। दोपहर करीब दो बजे अस्पताल प्रशासन की ओर से युवक को एम्स ऋषिकेश रेफर किया जा रहा था तो ट्रामा सेंटर के बाहर युवक हाथ से डिप निकालकर गेट की ओर दौड़ने लगा। युवक के पीछे उसके परिजन भी भागने लगे। बाद में पुलिसकर्मियों ने युवक को पकड़कर एंबुलेंस
16 लोगों को दी छुट्टी
सिविल अस्पताल में शुक्रवार से इलाज करा रहे 16 लोगों के स्वास्थ्य में सुधार आने पर शनिवार को उन्हें छुट्टी दे दी गई। सीएमएस डॉ. डीके चक्रपाणि ने बताया बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य में सुधार आने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
मजिस्ट्रेटी जांच के लिए अस्पताल पहुंचे एडीएम
जहरीली शराब पीने से हुई दो दर्जन से अधिक मौतों की जिला प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कर दी गई है। शनिवार को जांच अधिकारी एडीएम वित्त ललित नारायण मिश्रा ने विनय विशाल अस्पताल और सिविल अस्पताल में पहुुंचकर मरीजों की जानकारी ली।
एडीएम ने सिविल अस्पताल में शुक्रवार और शनिवार को भर्ती हुए, रेफर किए गए, मृत लोगों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विवरण एकत्रित किया। विनय विशाल अस्पताल से भी मरीजों की जानकारी जुटाई गई। मजिस्ट्रेटी जांच में बयान बाद में दर्ज कराए जाएंगे। शुक्रवार को जिला प्रशासन की ओर से एडीएम वित्त को मजिस्ट्रेटी जांच का अधिकारी बनाया गया था।
मृतकों के परिवार को सरकार देगी दो-दो लाख रुपये का मुआवजा
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को जहरीली शराब कांड में मृत लोगों के आश्रिताें के दो-दो लाख रुपये और अस्पताल में भर्ती व्यक्तियों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का एलान किया है। यूपी सरकार ने शुक्रवार को मुआवजे की घोषणा कर दी थी।
मुख्यमंत्री ने हरिद्वार जिले की भगवानपुर तहसील के गांवों में जहरीली शराब पीने से हुई लोगों की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्हाेंने बताया कि मृतकों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये तथा गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। प्रभावित व्यक्तियों को समुचित चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एडीएम हरिद्वार की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है।
‘सरकार के पास दर्द बांटने का भी समय नहीं’
हरीश रावत जब लोगों से मिलकर दर्द बांट रहे थे तो अधिकतर लोगों के आंसू रुक नहीं रहे थे। यही सिलसिला शाम के समय पहुंचे सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के सामने भी था। लोगों को दिलासा देते हुए दोनों नेता खुद भी निशब्द दिखे। लोगों की नाराजगी उनके सामने भी छलकी। बिंडूखड़क निवासी कुलबीर सिंह का कहना है कि चुनाव के समय हर कोई नेता क्षेत्र में डेरा डाले रहते हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद भी कई सभाएं करते हैं लेकिन दो दर्जन से अधिक मौतों के बाद भी यहां आने का समय उनके पास नहीं है। उनका कहना था कि ऐसी सरकार से इंसाफ की क्या उम्मीद की जाए। इसी गांव के ब्रिजेश कुमार ने कहा कि आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने भी लोगों के बीच आने की जरूरत महसूस नहीं की। बिंडूखंडक निवासी महावीर और धारा सिंह का कहना था कि इसी तरह के माहौल में सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों को दर्द बांटने के लिए यहां आना चाहिए था।
बाल्लुपुर के विपिन और सतीश भी इस बात से खासे नाराज दिखे की मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के बीच आकर उनके आंसू पोंछने तक की जहमत नहीं उठाई। हालांकि राज्य सरकार की ओर से शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और मुख्यमंत्री के सलाहकार नरेंद्र सिंह समेत भाजपा के कई नेता शुक्रवार को ही मृतकों के बीच पहुंच गए थे।