आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की आरटीआई पर केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को 15 दिन के अंदर विदेशों से वापस लाए गए काले धन की जानकारी देने को कहा है। कहा है कि पीएमओ कार्यालय में केंद्रीय मंत्रियों के भ्रष्टाचार संबंधित शिकायतों का ब्योरा भी संजीव को उपलब्ध कराएं।
पढ़िए, उस अफसर के बारे में जिसकी आरटीआई ने किया पीएमओ की नाक में दम
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बता दें कि आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की अपील पर सुनवाई करते मुख्य सूचना आयुक्त राधाकृष्ण माथुर ने 16 अक्तूबर को उक्त आदेश दिया। संजीव ने 7 अगस्त, 2017 को प्रधानमंत्री कार्यालय से 16 बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थीं।
2002 बैच के पास आउट हरियाणा काडर के अफसर संजीव चतुर्वेदी को रमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वह बेहद जोशीले अफसर हैं। 1995 में इन्होंने मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद से बीटेक किया।
संजीव चतुर्वेदी मूलत: हरियाणा काडर के अफसर हैं। इनको पहली पोस्टिंग कुरुक्षेत्र में मिली, जहां इन्होंने हांसी बुटाना नहर बनाने वाले ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज करवाई। एम्स में संजीव ने अपने दो साल के कार्यकाल में 150 से ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए। केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद संजीव को सीवीओ पद से हटा दिया गया, जिस पर काफी विवाद भी हुआ।
2014 में संजीव को स्वास्थ्य सचिव ने ईमानदार अधिकारी का तमगा दिया था। संजीव ने 2009 में हरियाणा के झज्जर और हिसार में वन घोटालों का पर्दाफाश किया। 2009 में ही संजीव पर एक जूनियर अधिकारी संजीव तोमर को प्रताड़ित करने का आरोप लगा, हालांकि बाद में वह आरोप मुक्त हो गए।