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Uttarakhand: देहरादून एयरपोर्ट पर खाने पीने के संचालन से जुड़ीं याचिकाएं खारिज, उच्च न्यायलय में दायर की गई थी

Thu, 26 Mar 2026 12:27 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, जौलीग्रांट (ऋषिकेश)
संवाद न्यूज एजेंसी, जौलीग्रांट (ऋषिकेश) Published by: Renu Saklani Updated Thu, 26 Mar 2026 12:27 PM IST
सार

देहरादून एयरपोर्ट पर खाने पीने के संचालन से जुड़ीं याचिकाएं खारिज कर दी गई। इस संबंध में उच्च न्यायलय में याचिका दायर की गई थी।

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Petitions related to food and beverage operations at the Dehradun airport dismissed filed in High Court
Court Room - फोटो : ANI

विस्तार

देहरादून एयरपोर्ट पर फूड एंड बेवरेज संचालन को लेकर चल रहे मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मनीष टैक्सी सर्विस की ओर से दायर दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनाया है।

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एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने वर्ष 2024 में फूड एंड बेवरेज आउटलेट्स के संचालन के लिए कंसेशन एग्रीमेंट किया था, जिसके तहत याचिकाकर्ता की फर्म को सात वर्षों के लिए संचालन का अधिकार दिया गया था। लेकिन बाद में लाइसेंस शुल्क के भुगतान और अन्य शर्तों के पालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था।  
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टेंडर प्रक्रिया को भी रोकने की की थी मांग
एएआई का आरोप था कि याचिकाकर्ता समय पर बकाया राशि जमा नहीं कर सका है। जिस संबंध में कई नोटिस जारी किए गए। बकाया राशि न चुकाने पर एएआई द्वारा बैंक गारंटी से संबंधित राशि वसूली करने के बाद 31 मई 2025 को कंसेशन एग्रीमेंट समाप्त कर दिया। याचिकाकर्ता ने एएआई की इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए एएआई द्वारा जारी टेंडर प्रक्रिया को भी रोकने की मांग की थी।
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उनका कहना था कि उन्हें पूरी साइट समय पर नहीं दी गई, जिससे व्यवसाय प्रभावित हुआ। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच विवाद पूरी तरह अनुबंध से संबंधित है और इसके समाधान के लिए एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में सीधे रिट याचिका के जरिए हस्तक्षेप उचित नहीं है।

याचिकाकर्ता उचित मंच पर अपनी बात रख सकते
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता पहले से ही आर्बिट्रेशन और वाणिज्यिक न्यायालय में जा चुके हैं। जहां यह मामला विचाराधीन है। इसलिए इस स्तर पर कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप करना आवश्यक नहीं है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर अंतिम टिप्पणी नहीं है।

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याचिकाकर्ता उचित मंच पर अपनी बात रख सकते हैं। इसके साथ ही दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गई। वहीं याचिकाकर्ता  मनीष चक्रवर्ती ने बताया कि  केस खारिज नहीं हुआ है। कोर्ट ने जिला अदालत में जाने को कहा है। इसलिए वह जिला अदालत में जाकर अपनी बात रखेंगे।

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