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उत्तराखंड में हर आदमी कमाता है एक लाख सालाना!

Sat, 12 Jul 2014 01:11 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 12 Jul 2014 01:11 AM IST
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per capita income of uttarakhand

बीते साल आपदा की चोट खाए प्रदेश के लिए अच्छी खबर है। राज्य की अर्थव्यवस्था सुधार की ओर है। शुक्रवार को अर्थ एवं संख्या निदेशालय की ओर से जारी अनुमान के मुताबिक प्रदेश की प्रति व्यक्ति आमदनी पांच अंकों से बढ़कर छह अंकों में अर्थात एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।

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प्रदेश के विकास दर का ग्राफ भी 2012-13 के मुकाबले ऊपर की ओर गया है। जीडीपी, प्रति व्यक्ति आय और विकास दर में हुए सुधार को देखते हुए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है।
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जून 2013 की आपदा के एक साल बाद का आर्थिक सर्वे बता रहा है कि उत्तराखंड संभल रहा है। देश में जहां प्रति व्यक्ति आय मात्र 74 हजार रुपये है उसके मुकाबले प्रदेश की आय एक लाख रुपये से ऊपर पहुंच गई है।
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प्रदेश की विकास दर 2013-14 में 5.65 प्रतिशत हो सकती है, जो सुधार को दिखा रहा है। हालांकि वर्ष 2011-12 की तुलना में यह अब भी बहुत कम है। वर्ष 2013-14 के लिए प्रदेश की जीडीपी 1,22,433 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वर्ष 2012-13 में 1,07,868 करोड़ जीडीपी था।

जीडीपी तो दी पर जीईपी को भूले

per capita income of uttarakhand

जून 2013 की आपदा के तुरंत बाद ही प्रदेश सरकार ने जीईपी जारी करने का भी वादा किया था। आपदा के एक साल बाद जीडीपी के आंकड़े तो सामने आए पर जीईपी को बिल्कुल ही दरकिनार कर दिया गया।

यह तब है जबकि प्रदेश में पुनर्निर्माण के तहत व्यापक पैमाने पर निर्माण कार्य की तैयारी की जा रही है और प्रदेश सरकार पर्यावरण के संरक्षण का लगातार दावा कर रही है।

वर्ष ---------- विकास दर (प्रतिशत) - प्रति व्यक्ति आय (रुपये में)
2011-12 ----- 9.37 ----------------- 85,372
2012-13 ----- 5.61 ----------------- 91,191
2013-14 ----- 5.65 ----------------- 1,03,349


प्रति व्यक्ति आय = कुल घरेलू उत्पाद/जनसंख्या
प्रति व्यक्ति आय का आकलन इस तरह से करना तभी फायदेमंद है जब पूरे प्रदेश में आय का वितरण एक समान हो। पर उत्तराखंड में पर्वतीय जिलों के मुकाबले मैदानी क्षेत्रों में उत्पादन, आय के स्रोत अधिक हैं।

यही कारण है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भारी नुकसान के बावजूद प्रति व्यक्ति आय में कोई अंतर नहीं आया है। इससे स्पष्ट है कि मैदानी क्षेत्रों में उत्पादन, आय आदि में बढ़ोतरी जारी है।

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