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अब 'कंप्यूटर' से भारी बर्फबारी में भी जा सकेंगे औली
विजय बमोला/अमर उजाला, जोशीमठ (चमोली)
Updated Fri, 06 Dec 2013 04:20 PM IST
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध हिम क्रीड़ा स्थली औली तक पहुंचने के लिए जोशीमठ से 4.1 किमी का रोपवे अब कंप्यूटर से संचालित होगा।
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पावर जनरेटर स्थापित
रोपवे में खराबी आने पर इसे शीघ्र ठीक किया जा सकेगा। इन दिनों रोपवे का नवीनीकरण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। रोपवे के संचालन में अब तक तीन जनरेटर कार्य कर रहे थे। अब यहां एक पावर जनरेटर स्थापित किया गया है।
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भारी बर्फबारी के बावजूद पर्यटक रोपवे से औली का दीदार कर सकेंगे। साथ ही ट्राली में लाइटिंग की व्यवस्था भी की जा रही है। वर्ष 2011 के जनवरी माह में औली में सैफ गेम्स हुए थे। तब से जोशीमठ-औली रोपवे बंद है।
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ऐसे में पर्यटन व्यवसाय को भी लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्ष 2012 में जीएमवीएन ने रोपवे को ठीक करने के लिए टेंडर आमंत्रित किए। इसके बाद स्पेज ऐज एजेंसी ने रोपवे को ठीक करने का जिम्मा लिया।
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रोपवे को ठीक करने में साढे़ चार करोड़ रुपए की लागत आएगी। इन दिनों कंपनी द्वारा रोप की इलेक्ट्रॉनिकल और मैकेनिकल जांच की जा रही है है। इसके बाद होलज रोप और मैन रोप की शिफ्टिंग का कार्य किया जाएगा।
होलेज रोप पहुंची जोशीमठ
गुरुवार को रोपवे की होलेज रोप जोशीमठ पहुंच गई है। रोपवे को संचालित करने के लिए दो रोप लगाई जाती हैं। इसमें एक रोप स्थित रहती है तथा एक रोप ट्राली को खींचने का कार्य करती है। इसी को होलेज रोप कहा जाता है।
यह रोप ट्राली के संचालन से धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जाती है। जिससे करीब पांच साल में होलेज को बदला जाना जरूरी होता है। औली रोपवे की होलेज करीब 11 वर्षों बाद बदली जा रही है। इस बार मैन रोप की शिफ्टिंग भी की जा रही है।
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औली रोपवे को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से बनाया जा रहा है। कंप्यूटर से रोपवे का संचालन होगा। आधुनिक तकनीक से खराब होने पर इसे शीघ्र ठीक किया जा सकता है। ट्राली में लाइटिंग की जाएगी।
- फारुख अहमद, मैकेनिकल इंजीनियर, स्पेज ऐस, जोशीमठ