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एमडीडीए के मास्टर प्लान में 'जंगलराज'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 02 Dec 2013 11:52 AM IST
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देहरादून का संशोधित मास्टर प्लान आम लोगों के लिए सिरदर्दी और माफियाओं के लिए फायदे का सौदा बन गया है।
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खामियां दूर नहीं की गई
एमडीडीए द्वारा जारी किए गए इस मास्टर प्लान को उत्तरांचल इंजीनियर्स एंड ड्राफ्ट्समैन एसोसिएशन ने सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एसोसिएशन ने दो दिन तक प्लान के अध्ययन के बाद साफ किया है कि पिछले मास्टर प्लान की 80 से अधिक खामियां दूर नहीं की गई हैं।
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कुछ ऐसे संशोधन हुए हैं, जिनसे आम आदमी की दुश्वारियां बढ़ेंगी, लेकिन भूमाफिया को कब्जों की खुली छूट मिल जाएगी। ये हैं मास्टर प्लान की खामियां-
बाजावाला अब कैंट में
बाजावाला क्षेत्र वन अनुसंधान संस्थान के पीछे एमडीडीए क्षेत्र में पड़ता है। वर्ष 2008 के मास्टर प्लान में इसका भू उपयोग आवासीय था। संशोधित मास्टर प्लान में इसे गढ़ी कैंट क्षेत्र में दर्शा दिया गया है। इससे यहां के लोगों के लिए नक्शा पास कराने का संकट खड़ा हो जाएगा। कैंट में नक्शा पास होगा नहीं, मास्टर प्लान के अनुसार एमडीडीए करेगा नहीं।
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सरकारी दफ्तर आवासीय क्षेत्र में
रिंग रोड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी कार्यालय बन हैं। इनमें राजस्व परिषद से लेकर राज्य सूचना आयोग तक शामिल हैं।
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नए मास्टर प्लान में इस क्षेत्र को आवासीय दर्शाया गया है। जबकि मानक के अनुसार यह क्षेत्र पब्लिक या सेमी पब्लिक क्षेत्र में आना चाहिए था।
जंगल में आवास और खेती
राजपुर में एमडीडीए का पार्क है। इसके नीचे के क्षेत्र का भू उपयोग जंगल है। मौके पर भी जंगल ही है, कागजों में भी। लेकिन संशोधित प्लान में इसे आवासीय क्षेत्र दर्शाया गया है।
जाहिर है इससे जंगल की जमीन पर कब्जे बढ़ेंगे। इसी तरह सहस्त्रधारा रोड पर किरसाली और सालागांव हैं। दोनों क्षेत्रों में घने जंगल हैं। लेकिन मास्टर प्लान में इसे खेती की जमीन बताया गया है।
पर्यावरण संरक्षण भी ताक पर
मास्टर प्लान में पर्यावरण के साथ जमकर खिलवाड़ किया गया है। दून वैली नोटिफिकेशन लागू होने के बावजूद मानकों की अनदेखी की गई। नदियों के किनारे सैकड़ों एकड़ जमीन को खेती से बदलकर आवासीय कर दिया गया।
बड़ोंवाला में आसन नदी के किनारे 300 बीघा जमीन का भू उपयोग आवासीय किया गया है। ऐसी ही गड़बड़ियां रिस्पना, बिंदाल सहित नदियों के किनारे की गई है। इससे नदी किनारे कब्जे बढ़ने की आशंका है।
यह सड़क है कहां?
संशोधित मास्टर प्लान में कुछ सड़कें ऐसी दर्शाई गई हैं, जो मौके पर हैं ही नहीं। धोरण से राजेश्वर नगर के बीच सड़क बताई गई है, जबकि यहां घनी आबादी है। खास बात यह है कि यहां बीच में सीमा विहार का लेआउट भी एमडीडीए ने पास किया है।
इसी तरह हरिद्वार रोड पर राजेश्वरी नर्सरी के पास सड़क 50 मीटर चौड़ी दिखाई गई है, लेकिन मौके पर चौड़ाई काफी कम है। धोरण से सहस्त्रधारा-राजपुर रोड को जोड़ने वाला मार्ग महज 12 मीटर का है, लेकिन इसे 30 मीटर दिखाया गया है। पिछले प्लान में यह 18 मीटर बताई गई थी। बीच में आईटी पार्क पड़ने के कारण यहां सड़क को 30 मीटर चौड़ा करना असंभव है।
नीली बत्ती वाले ने की बिल्डरों से सेटिंग
उत्तराखंड ग्राम्य एवं नगर नियोजन विभाग का कार्यालय टीएचडीसी कॉलोनी में है। सूत्रों के मुताबिक यहां हर रोज शाम पांच बजे के बाद नीली बत्ती की गाड़ी में सवार एक लंबे कद का अफसर आता था।
कार से उतरते ही यह अधिकारी मोबाइल पर बात करते हुए दफ्तर में घुसता, जिसके बाद एक-एक कर बिल्डरों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता। सूत्र बताते हैं कि प्लान में ऐसे संशोधन करा दिए गए, जो नियमानुसार हो नहीं सकते।
गलत मास्टर प्लान से आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, ड्राफ्ट्समैन और एमडीडीए को दिक्कत आती है। इससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। खामियों का निराकरण न करके सरकार ने एक अव्यवस्थित शहर बनाने का कदम उठाया है।
- डीएस राणा, महासचिव, उत्तरांचल इंजीनियर्स एंड ड्राफ्ट्समैन वेलफेयर एसोसिएशन
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