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बारिश नहीं होने से सत्तर प्रतिशत तक बर्बाद हो गई मटर की फसल
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जौनसार बाबर क्षेत्र में इस बार कम बारिश होने से मटर की फसल को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र की प्रमुख फसल होने के कारण भारी संख्या में किसान मटर की खेती करते हैं, लेकिन इस बार के मौसम में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है, जिससे किसानों में मायूसी दिखाई दे रही है।
जौनसार बावर के अधिकतर किसान कैश क्रॉप के रूप में सब्जियों की खेती करते हैं, जिससे किसानों को अच्छी खासी आय हो जाती है। प्रत्येक किसान पारंपरिक खेती के बजाय सब्जी उत्पादन से अपनी आय कमा रहा है, लेकिन इस बार के मौसम ने किसानों को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। बताते चलें कि बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र में बोई गई मटर की फसल 70 प्रतिशत तक खराब हो चुकी है। मटर की बुवाई नवंबर के अंतिम सप्ताह व दिसंबर के प्रथम सप्ताह से लेकर अप्रैल माह में तैयार होने तक सिंचाई की आवश्यकता रहती है, लेकिन इस बार बारिश नहीं होने के कारण फसल को समय से पानी नहीं मिल सका। इसके चलते अधिकतर किसानों की खेती बर्बाद हो गई है। किसान भीम सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, प्रेम सिंह, मुकेश शर्मा, रणसिंह चौहान और टीकम सिंह चौहान का कहना है कि बुवाई के समय अधिक बारिश होने व बाद में वर्षा नहीं होने से व्यापक स्तर पर फसल को नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि इस बार उनकी मेहनत व खर्च सबकुछ बर्बाद हो गया है। उद्यान विभाग के प्रभारी डॉ. रामकुमार का कहना है कि वर्षा के समय से नहीं होने से मटर, गेहूं, जौ व मसूर जैसी फसलों को क्षेत्र में नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि किसानों को हुए नुकसान की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
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जौनसार बावर के अधिकतर किसान कैश क्रॉप के रूप में सब्जियों की खेती करते हैं, जिससे किसानों को अच्छी खासी आय हो जाती है। प्रत्येक किसान पारंपरिक खेती के बजाय सब्जी उत्पादन से अपनी आय कमा रहा है, लेकिन इस बार के मौसम ने किसानों को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। बताते चलें कि बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र में बोई गई मटर की फसल 70 प्रतिशत तक खराब हो चुकी है। मटर की बुवाई नवंबर के अंतिम सप्ताह व दिसंबर के प्रथम सप्ताह से लेकर अप्रैल माह में तैयार होने तक सिंचाई की आवश्यकता रहती है, लेकिन इस बार बारिश नहीं होने के कारण फसल को समय से पानी नहीं मिल सका। इसके चलते अधिकतर किसानों की खेती बर्बाद हो गई है। किसान भीम सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, प्रेम सिंह, मुकेश शर्मा, रणसिंह चौहान और टीकम सिंह चौहान का कहना है कि बुवाई के समय अधिक बारिश होने व बाद में वर्षा नहीं होने से व्यापक स्तर पर फसल को नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि इस बार उनकी मेहनत व खर्च सबकुछ बर्बाद हो गया है। उद्यान विभाग के प्रभारी डॉ. रामकुमार का कहना है कि वर्षा के समय से नहीं होने से मटर, गेहूं, जौ व मसूर जैसी फसलों को क्षेत्र में नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि किसानों को हुए नुकसान की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
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