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तेज होगी कैबिनेट मंत्री की कुर्सी पाने की दौड़
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 08 Feb 2015 01:17 PM IST
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बीमारी के चलते कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश के सक्रिय न रहने पर उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कांग्रेस में कुछ महीनों से तेज होने लगी थी, लेकिन सीएम हरीश रावत ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी।
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पीडीएफ कोटे के मंत्रियों को कांग्रेस से जोड़ने में नाकाम
अब सुरेंद्र राकेश के निधन से मंत्रिमंडल में एक स्थान खाली हो गया है। लाजिमी है एक बार फिर कांग्रेस में मंत्री पद पाने वालों में दौड़ और होड़ शुरू हो जाएगी। सीएम रावत भले ही तकनीकी तौर पर पीडीएफ कोटे के मंत्रियों को कांग्रेस से जोड़ने में नाकाम रहे हों, लेकिन पार्टी नेताओं के खुलकर विरोध के बावजूद वे उन्हें नजदीक लाएं हैं।
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सुरेंद्र की बीमारी केदौरान ही ऐसी चर्चा होने लगी थी कि उन्हें इस्तीफा दिला उनकी पत्नी या भाई को टिकट देकर विधायक चुनवा दिया जाए। अब कांग्रेस उन चर्चाओं को मूर्त रूप देना चाहेगी, ताकि उपचुनाव में सहानुभूति के आधार पर इस सीट को आसानी से जीत सके। हालांकि कांग्रेस उपचुनाव तक मंत्रिमंडल की खाली सीट भरने के पक्ष में नहीं दिखती।
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दूसरी ओर मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए रावत के विरोधी खेमे में जितने नाम हैं, उतने ही उनके अपने हैं। बहुगुणा कैंप लंबे समय से सुबोध उनियाल को मंत्री बनाने के लिए दबाव बनाए है।
उसी कैंप के ही नवप्रभात, शैलेंद्र सिंघल भी वरिष्ठता की सूची में हैं। अपने दमखम से उपचुनाव में जीतकर आए हीरा सिंह बिष्ट भी दावेदारों में हैं, जिन्हें रावत विरोधी खेमे का माना जाता है। मदन बिष्ट और राजेंद्र भंडारी भी दावेदारों की पंक्ति में खड़े हैं।
रावत मंत्रिमंडल में फिलहाल जो मंत्री हैं, उनमें दिनेश धनै को छोड़कर सभी उन्हें विरासत में मिले हैं। रावत पर अपने खेमे के वरिष्ठ विधायकों का दबाव झेलना पड़ सकता है। वहीं बसपा के शेष दो विधायक भी साथी के न रहने पर मंत्री पद मांग सकते हैं।