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नहीं रहे 'जन्मजात इंजीनियर' टाफी वाले बाबा
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 04 Dec 2013 12:41 PM IST
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85 वर्षीय पंडित साकेश्वर शर्मा नहीं रहे। जीवन के अंतिम दिनों में टाफी वाले बाबा के नाम से मशहूर हुए साकेश्वर जन्मजात इंजीनियर थे। पंडित साकेश्वर का निधन सोमवार की रात 10 बजे हुआ।
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आश्चर्य का विषय है कि जिस साकेश्वर ने इंजीनियरिंग की एबीसीडी भी नहीं पढ़ी, उनका योगदान प्रख्यात प्रतिष्ठान भेल और चीला पावर प्रोजेक्ट में रहा।
पं. साकेश्वर की अंतिम यात्रा उनके ज्वालापुर स्थित आवास से शुरू हुई और कनखल पहुंची। उनके पुत्र कमल शर्मा ने मुखागिभन प्रदान की। नगर के सभी प्रमुख बुद्धिजीवी, राजनेता, व्यवसायी, पत्रकार, लेखक एवं चिंतक उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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इन सबकी उपस्थिति बताती है कि पं. साकेश्वर का पंचपुरी के जनजीवन में क्या स्थान था। रेडियो के जमाने में पंचपुरी में केवल साकेश्वर शर्मा एवं धर्मेंद्र पटुवर ही दो ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने पंचपुरीवासियों के सभी रेडियो ठीक किए। तकनीकी ज्ञान कहीं से भी हासिल किये बगैर ये दोनों अभियांत्रिकी में अपना एक अलग मुकाम बना गए।
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1960 के दशक में जब देश के विशाल प्रतिष्ठान का निर्माण चल रहा था, तब रूसी अभियंता अनेक बार साकेश्वर और धर्मेंद्र को रूस से आयी मशीनें लगवाने के लिये अपने साथ ले गये। भेल में लगी अधिकांश मशीनें और भट्टियां स्थापित कराने में पं. साकेश्वर का अभूतपूर्व योगदान रहा।
समीपवर्ती चीला में जब बिजलीघर बनाया जा रहा था, तब भी कोई गड़बड़ी आने पर बड़े-बड़े विद्युत अभियंता साकेश्वर और धर्मेंद्र को अपने साथ लिवा लाते थे। भेल और चीला प्रोजेक्ट के निर्माण में दोनों का अभूतपूर्व योगदान उस पीढ़ी के लोगों की जुबान पर है।
जीवन के आखिरी दिनों में पं. साकेश्वर प्रेमभिक्षु महाराज के शिष्य बन गए। उन्हीं के निर्देश पर जीवन के करीब 15 वर्ष गली-गली जाकर बच्चों को टाफियां बांटते हुए बिताए। पंचपुरी के गलियों में उन्हें देखते ही छोटे और बड़े टाफी वाले बाबा कहकर उनका स्वागत करते थे। पं. साकेश्वर के जाने का दर्द मंगलवार को हर उस चेहरे पर देखा गया जिसने उनके जाने की खबर सुनी।