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Dehradun: नमक के तेजाब से पुराने स्टांप को कोरा कर देता था पालीवाल, ऐसे करता था पूरा खेल

Sun, 08 Oct 2023 04:09 PM IST
देहरादून ब्यूरो अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sun, 08 Oct 2023 04:09 PM IST
सार

पूरा बैनामा तैयार करने के बाद आरोपी खुद ही उसमें तत्कालीन अधिकारियों के हस्ताक्षर भी कर देता था। वह पूरा बैनामा बनाने के एक लाख और हस्ताक्षर करने के 25 हजार रुपये वसूलता था।

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Dehradun Paliwal used to erase old stamps with salt acid, this is how he used to play the whole game
फ्रॉड - फोटो : Istock(प्रतीकात्मक तस्वीर)

विस्तार

रजिस्ट्री कार्यालय में फर्जी बैनामों को बनाने में फोरेंसिक एक्सपर्ट अजय पालीवाल का सबसे अहम रोल है। वह अपने फोरेंसिक के पूरे ज्ञान का इस्तेमाल इस फर्जीवाड़े में करता था। पालीवाल नमक के तेजाब से पुराने कागजों को कोरा बना देता था। इसके बाद स्केच पैन से गीला कर उस पर दोबारा से नई भाषा लिख दी जाती थी।

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पूरा बैनामा तैयार करने के बाद आरोपी खुद ही उसमें तत्कालीन अधिकारियों के हस्ताक्षर भी कर देता था। वह पूरा बैनामा बनाने के एक लाख और हस्ताक्षर करने के 25 हजार रुपये वसूलता था। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने शुक्रवार को अजय मोहन पालीवाल को गिरफ्तार किया था। पालीवाल ने 1988 में फोरेंसिक साइंस का पत्राचार से डिप्लोमा किया था। वर्ष 1994 में डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। एलएलबी करने के बाद वह मुजफ्फरनगर कचहरी में प्रैक्टिस करने लगा, लेकिन उसे फोरेंसिक के काम में ही रुचि थी।

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लिहाजा, उसने 2017 में आईएफएस पूणे से फोरेंसिक में पीजी सर्टिफिकेट कोर्स किया। वर्ष 2019 में ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी दीमापुर, नागालैंड से एमएससी फोरेंसिक पास की। पहले वह सुभाष विरमानी के लिए हस्ताक्षर मिलान का काम करता था। इसके बाद रोहिताश के माध्यम से वह कमल विरमानी से मिला। अधिवक्ता कमल विरमानी केपी सिंह और ओमवीर तोमर के साथ मिला हुआ था तो उसने फर्जी बैनामों के खेल के बारे में पालीवाल को बताया।



इस पर पालीवाल तैयार हो गया और उसने अपने पूरे फोरेंसिक के ज्ञान को इस खेल में उतार दिया। उसने फर्जीवाड़े से रक्षा सेन, फरखंदा, जगमोहन, राजेंद्र सिंह, त्रिभुवन, दिपांकर नेगी, मांगेराम, महिला आईएएस प्रेमलाल, रामनाथ, रामचंद्र, राजकुमारी पदमा कुमारी आदि की संपत्तियों से संबंधित फर्जी बैनामे और गिफ्ट डीड तैयार की। वर्ष 2021-2022 में केपी सिंह के खाते से अजय मोहन पालीवाल के बैंक खातों में लाखों रुपये भेजे गए हैं।

ठेकेदारी के टेंडर वाले स्टांप पेपर में करते थे खेल
इन सभी जालासाजों का आधा जीवन कचहरी में ही बीता है। ऐसे में वह जानते थे कि कहां से उन्हें क्या दस्तावेज मिल सकते हैं। इसके लिए उन्होंने स्टांप पेपर की खोज की। उन्होंने पुराने टेंडर वाले दस्तावेज जो कि नष्ट किए जाने थे उन्हें वहां से हटा लिया। टेंडर के लिए ठेकेदार कई तरह के स्टांप जमा करते हैं। इन्हीं स्टांप को वे नमक के तेजाब से धुल देते थे। इसके बाद गीली रुई से रगड़ते थे। इससे स्टांप की यह स्याही पतली परत के साथ उतर जाती और स्टांप कोरा हो जाता था। स्कैच पेन को गीला कर पुरानी लाइन के ऊपर लिखते थे। इतना काम होने के बाद तत्कालीन अधिकारियों के हस्ताक्षरों को स्कैन कर नए हस्ताक्षर भी कर देते थे।

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