14 साल से लापता मासूमों को 23 दिन में खोज निकाला
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14 साल यानी 5010 दिनों तक जिन लापता बच्चों को खोजने में पुलिस नाकाम रही। ‘ऑपरेशन स्माइल’ के 23 दिनों में उनमें से कई बच्चे पुलिस ने खोज निकाले। अब एक बड़ी कामयाबी के साथ यह सवाल भी उठता है, कि आखिर गुमशुदगी के मामलों में पहले इतनी संजीदगी क्यों नहीं दिखाई गई। यानी मामला दर्ज होने के बाद क्या बच्चों की खोज नहीं की गई। अगर खोजा गया तो ऐसी नौबत क्यों आई?
यूपी के गाजियाबाद पुलिस की तर्ज पर प्रदेश में एक जनवरी से शुरू हुए ‘ऑपरेशन स्माइल’ के तहत लापता 331 बच्चों में 144 को ढूंढ लिए गए हैं। कई मामले तो ऐसी भी हैं, जिनमें परिवार अपने बच्चों के घर वापसी की आस छोड़ चुके थे। प्रदेश में सबसे ज्यादा बच्चे ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून से गायब चल रहे थे।
हैरानी की बात यह कि अधिकांश बच्चे प्रदेश के आसपास के जिलों से ही बरामद हुए हैं। इसके लिए पुलिस को ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ी है। जाहिर है कि पुलिस ने इतने सालों तक गुम बच्चों को ढूंढने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। हालांकि पुलिस टीम उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश भी गई, यहां भी कुछ कुछ बच्चे मिले।
बच्चे घर पहुंच गए, पुलिस अनजान
प्रदेश के 13 जिलों के डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (डीसीआरबी) की ओर से उपलब्ध सूची में 774 बच्चों के गायब होना दर्शाया गया था। पुलिस सत्यापन में 443 बच्चे ऐसे पाए गए, जो पहले ही अपनों के बीच पहुंच चुके थे। इससे संबंधित थाना पुलिस अनजान रही। न तो उन्होंने गंभीरता दिखाई। न ही डीसीआरबी रिकार्ड अपडेट किए।
अब परिवार को ढूंढना चुनौती
‘आपरेशन स्माइल’ फिलहाल 31 जनवरी तक प्रस्तावित है। 27 बच्चे ऐसे हैं, जिनके परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्हें फिलहाल बाल संरक्षण गृह में रखा गया है। उनके परिवार को ढूंढना चुनौती है, क्योंकि बच्चे अपने बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं। गायब बच्चों की एलबम से उनका मिलान नहीं हो सका है। अब तक 144 बच्चे मिल गए है, जबकि अन्य की तलाश में पुलिस टीम जुटी हैं।
- ममता बोरा, नोडल अधिकारी आपरेशन स्माइल
सामूहिक प्रयासों से मिली कामयाबी
‘आपरेशन स्माइल’ के तहत प्रत्येक जिले में पुलिस की स्पेशल टीम गठित करने के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली गई थी। सामूहिक प्रयासों से ही यह कामयाबी मिली है। 31 जनवरी को समीक्षा के बाद आगे मुहिम चलाने पर फैसला लिया जाएगा।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक