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सिर्फ 13 अनुयायियों ने किए स्वामी सानंद की देह के अंतिम दर्शन, परिवार और मातृसदन से नहीं आया कोई  

Mon, 14 Jan 2019 08:32 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 14 Jan 2019 08:32 AM IST
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Only 13 people visit aiims for Swami sanand antim darshan in 10 sunday
स्वामी सानंद की देह के अंतिम दर्शन करते अनुयायी

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के पार्थिव शरीर के दर्शन करने के लिए दस रविवार में केवल 13 अनुयायी ही पहुंचे। अंतिम रविवार को केवल दो अनुयायियों ने ही स्वामी सानंद के दर्शन किए। दिलचस्प बात यह है कि मातृसदन से एक भी अनुयायी अंतिम दर्शन को नहीं पहुंचा।

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वहीं परिवार के सदस्य भी दर्शन करने को नहीं पहुंचे। 111 दिन से गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए आमरण अनशन कर रहे दिवंगत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का बीते वर्ष 11 अक्तूबर को निधन हो गया था।
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मातृसदन ने स्वामी सानंद की मृत्यु को लेकर काफी हंगामा भी किया था। उन्होंने स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन करने के लिए कुछ दिनों उनके पार्थिव शरीर को मातृसदन में रखने की अनुमति उच्च न्यायालय से मांगी थी।

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पहले और दसवें रविवार को पहुंचे अनुयायी

इस मांग को न्यायालय ने खारिज कर दिया था। बाद में अपील दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एम्स ऋषिकेश को आदेश जारी करते हुए कहा कि दस रविवार तक स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर के दर्शन करवाने के लिए व्यवस्था बनाई जाए। 11 नवंबर से एम्स ऋषिकेश ने अंतिम दर्शन के लिए स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर के दर्शन का इंतजाम किया।  

स्वामी सानंद के दर्शन करने के लिए 11 नवंबर को कुल छह, 18 और 25 नवंबर को एक भी नहीं, दो दिसंबर को तीन, नौ दिसंबर, 16 दिसंबर और 23 दिसंबर को कोई भी अनुयायी नहीं पहुंचा। वहीं 30 दिसंबर को एक, छह जनवरी को एक, 13 जनवरी को दो अनुयायी ही स्वामी के पार्थिव शरीर के दर्शन को पहुंचे। 
 
एम्स प्रबंधन के डर से नहीं गए दर्शन करने
मामले पर दयानंद का आरोप है कि वे एम्स प्रबंधन के डर से पार्थिव शरीर के दर्शन करने नहीं आए। उनका आरोप है कि पूर्व में 29 नवंबर को भी स्वामी आत्मबोधानंद को जबरन मातृसदन से एम्स लाकर जहर देने की कोशिश की गई थी। हमें आशंका थी कि एम्स गए तो प्रबंधन कोई भी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता था।

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