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वोट बैंक के लिए सरकार ने चला OBC का दांव

Sat, 19 Oct 2013 11:12 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 19 Oct 2013 11:12 AM IST
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OBC benefits income limit extended

उत्तराखंड सरकार ने आगामी चुनावों को देखते हुए दांव चल दिया है। इस बार सरकार ने ओबीसी कार्ड पर दांव लगाया है।

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शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में जहां ओबीसी के लाभ की आय सीमा 4.50 लाख से बढ़ाकर छह लाख रुपए वार्षिक कर दी गई, वहीं पूरे उत्तरकाशी जिले को पिछड़ा क्षेत्र घोषित कर दिया गया।

मनरेगा कर्मियों का मानदेय बढ़ाने का निर्णय
इसके अलावा कैबिनेट ने वर्ग-4 की जमीनों के अवैध कब्जे, गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट और आसामी पट्टों के नियमित करने और मनरेगा कर्मियों का मानदेय बढ़ाने का निर्णय लिया है।
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दिसंबर में पंचायत चुनाव है और अगले साल लोकसभा का चुनाव। इन चुनावों में कांग्रेस की नजर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वोटर पर है।

इसके संकेत ओबीसी पात्रता में आय सीमा बढ़ाने के सरकार के फैसले से साफ हैं। इसका फायदा प्रदेश की काफी बड़ी आबादी को मिलेगा।

वहीं उत्तरकाशी के भटवाड़ी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ ब्लाक के बचे हुए रवांल्टा-जौनपुरी लोगों को भी ओबीसी का दर्जा देकर सरकार ने लगभग पूरे उत्तरकाशी जिले को ओबीसी क्षेत्र घोषित कर दिया।

अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी

इस जिले की ही सवा तीन लाख की आबादी है। उत्तरकाशी जिला टिहरी संसदीय क्षेत्र में आता है, जिसमें पिछली बार उप चुनाव मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र साकेत बहुगुणा ने लड़ा था और अब अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

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इसके साथ वर्ग-4 की जमीनों पर हुए अवैध कब्जे, गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट और आसामी पट्टों को नियमित करने पर मुहर लगा कर सरकार ने सीधे तौर पर 75 हजार से ज्यादा परिवारों को फायदा दिया है। जिसमें से 60 हजार परिवार हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश के बीच अनुसूचित जाति के आसामी पट्टेधारक हैं।

चुनावी दाव
दस हजार हेक्टेयर भूमि पर करीब 18 हजार परिवार वर्ग-4 की जमीन पर कब्जाधारी हैं। सितारगंज समेत ऊधमसिंहनगर जिले और अन्य कई जगहों पर बांटे गए गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के पट्टे भी काफी बड़ी संख्या में हैं। चुनावी दाव में सरकार ने आंदोलन कर रहे मनरेगा कर्मियों पर भी मेहर बरसाई है।


बिना मांगे ही मनरेगा कर्मियों का मानदेय 4500 रुपए से बढ़ा कर 7500 रुपए मासिक कर दिया। जबकि उनके आंदोलन की प्रमुख मांग तदर्थ नियुक्ति थी। एससी-एसटी के बैकलॉग पदों को भरने का फैसला भी इसलिए लिया गया है।

कृषि और नौकरीपेशा को छूट

ओबीसी आय सीमा के दायरे में कृषि और सरकारी या गैर सरकारी नौकरी से जुड़े लोग नहीं आएंगे। उनकी वार्षिक आय छह लाख रुपए से ज्यादा होने पर भी उनको ओबीसी के लाभ मिलते रहेंगे।

प्रदेश में पांच फीसदी ओबीसी
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश की कुल आबादी में करीब पांच फीसदी ओबीसी हैं। पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों में इनकी लगभग समान रूप से संख्या है। अब इसमें उत्तरकाशी जिले के करीब डेढ़ लाख लोग और शामिल हो जाएंगे।

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