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अब 'सोन चिरइया' को बचाएगा भारत
प्रेम प्रताप सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 31 Jan 2014 10:03 AM IST
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भारत अब सोन चिरइया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को बचाएगा। यहीं से दुनिया के दूसरे मुल्कों में यह दुर्लभ पक्षी भेजा जा सकेगा।
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ब्रीडिंग सेंटर खोलने की मंजूरी
बमुश्किल दो सौ की संख्या में बची सोन चिरइया का वजूद बचाने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले सप्ताह ही ब्रीडिंग सेंटर खोलने की मंजूरी दे दी।
30 करोड़ रुपए की लागत वाला अपने किस्म का दुनिया का पहला ब्रीडिंग सेंटर गुजरात अथवा राजस्थान में खोला जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक अन्य विशेषज्ञों की मदद से सेंटर खोलने के लिए जगह की तलाश करेंगे।
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दुनिया में सिर्फ भारत में ही सोन चिरइया बची है। इनकी तादात लगातार घट रही है। इससे पक्षी प्रेमी चिंतित हैं। इसे बचाने का उपाय सुझाने को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले साल भारतीय वन्यजीव संस्थान को कहा था।
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संस्थान ने विस्तृत अध्ययन के बाद एक रिपोर्ट तैयार की। इसके आधार पर मंत्रालय सोन चिरइया के लिए ब्रीडिंग सेंटर खोलने जा रहा है। इस काम में इंग्लैंड, सऊदी अरब, आबूधाबी सहित विश्व के कई देशों के विशेषज्ञ भी मदद करेंगे।
इसी फरवरी में नई गणना
भारतीय वन्यजीव संस्थान की मदद से देश में सोन चिरइया की गणना फरवरी 2014 में एक बार फिर की जाएगी। इसकी तैयारी अंतिम चरण में है।
भारत की सबसे भारी चिरैया
भारतीय पक्षियों में सोन चिरइया सबसे वजनदार है। इसका भार आठ से 10 किलो तक मापा गया है। भारी-भरकम होने के बावजूद यह तेज उड़ान भरती है।
इन राज्यों में पाई जाती है
गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र
घास के घटते मैदानों से बढ़ा संकट
बड़े घास के मैदान पक्षी के लिए उपयुक्त वास स्थल होते हैं। मानसून से ठीक पहले इसका अंडे देने का समय होता है। लेकिन मैदानों के घटने और अवैध शिकार से इस पक्षी का वजूद ही संकट में पड़ गया है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के आधार पर ही ब्रीडिंग सेंटर खोला जाएगा। राजस्थान या गुजरात में जगह की तलाश करके मंत्रालय को रिपोर्ट दी जाएगी। संभव है कि साल भर में यह सेंटर शुरू हो जाएगा।
- डॉ. वाईएस झाला, वरिष्ठ वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून