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विधायक चैपिंयन की 'गोली' का मामूली निशाना
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 19 Sep 2013 12:40 AM IST
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उत्तराखंड के कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के आवास पर फायरिंग में दो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के घायल होने के मामले में पुलिस ने जमानतीय धाराओं 337 व 338 में रिपोर्ट दर्ज की है।
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विधि विशेषज्ञों की मानें तो मामला आर्म्स एक्ट और गैर इरादतन हत्या का बनाता है। पुलिस बगैर किसी व्यक्ति की तहरीर का इंतजार किए इस मामले में धारा 307 लगा सकती है।
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रिवाल्वर का लाइसेंस निरस्त
दून बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का कहना है कि जिलाधिकारी इस मामले में खुद संज्ञान लेकर आरोपी के रिवाल्वर का लाइसेंस निरस्त कर सकते हैं।
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मंत्री का आवास सार्वजनिक स्थल है। पुलिस को प्रकरण में खुद संज्ञान लेना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस तिवारी बताते हैं कि धारा 337 उस व्यक्ति पर लगाई जाती है जिसके क्रियाकलाप से किसी इंसानी जिंदगी पर संकट आया हो।
गैरइरादतन हत्या का मामला
इसमें मात्र छह माह की सजा का प्रावधान है। जबकि धारा 338 में केवल दो साल तक का कारावास हो सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव के मुताबिक प्रकरण में सीधे आर्म्स एक्ट और गैरइरादतन हत्या का मामला बनता है जो न सिर्फ गैरजमानती धाराएं हैं, बल्कि काफी कड़ी सजा का प्रावधान भी है।
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गोली चलाने वाले की मंशा
इसमें कोई भी व्यक्ति एफआईआर करा सकता है। बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दीपक कुमार घटना को शर्मनाक करार देते हुए कहते हैं कि इसमें पुलिस को यह देखना होगा कि गोली चलाने वाले की मंशा क्या थी।