फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   no development in uttarakashi kalap village.

उत्तराखंडः इस गांव में बेटी ब्याहने से डरते हैं लोग

Sat, 15 Nov 2014 01:57 PM IST
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, मोरी (उत्तरकाशी)
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, मोरी (उत्तरकाशी) Updated Sat, 15 Nov 2014 01:57 PM IST
विज्ञापन
no development in uttarakashi kalap village.

सहूलियतों की कमी किस कदर आधुनिक दौर में भी लोगों को आदिम युग की तरह जीने पर मजबूर करती है, इसे उत्तराखंड के एक गांव में आकर देखा जा सकता है।

विज्ञापन


उत्तरकाशी के कलाप गांव में रोजमर्रा के सामानों के लिए 25 किमी की पैदल दौड़ यहां के बाशिंदों की जिंदगी की दुश्वारी की कहानी खुद ब खुद बयां करती है। आलम यह है कि गांव की दुश्वारियों को देखते हुए यहां कोई अपनी बेटी नहीं ब्याहता।
विज्ञापन


गांव में 50 से ज्यादा कुंवारे ब्याह की बाट जोह रहे हैं। कई लोग तो रक्तसंबंधियों में ही शादियां कर रहे हैं जिससे कई आनुवांशिक समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अमर उजाला प्रतिनिधि ने उत्तरकाशी के मोरी प्रखंड में 66.99 हेक्टेयर पर बसे 96 परिवारों वाले कलाप गांव का दौरा किया तो यहां की दुश्वारियां सामने आईं। लोगों की आजीविका आलू, राजमा, रामदाना के उत्पादन और भेड़-बकरी पालन पर टिकी है।

आपदा के कारण ‌सदियों पीछे चला गया यह गांव

no development in uttarakashi kalap village.

प्राकृतिक आपदाओं और निकटवर्ती गोविंद वन्य जीव विहार की बंदिशों ने इस गांव को सदियों पीछे के दौर में धकेल दिया है। गांव को बाकी दुनिया से जोड़ने वाला सूपिन नदी का झूला पुल 2003 की बाढ़ में बह गया।

नैटवाड़ से इस गांव का इकलौता अश्व मार्ग भी तहस नहस हो गया। घर की जरूरत का सामान लोग करीब 25 किमी लंबे जंगल और चट्टानी दुर्गम रास्ते से पीठ पर ढोकर ले जाते हैं।

डेढ़ साल से गांव में बिजली नहीं आई है। ग्रामीण चीड़ के छिलकों से घर रोशन कर रहे हैं। रास्ता न होने से गांव में उत्पादित आलू, राजमा आदि सड़क तक पहुंचाने का खच्चर भाड़ा छह सौ रुपए है।

ऐसे में हाड़तोड़ मेहनत कर फसल उगाना भी घाटे का सौदा है। गांव की पांच एकड़ उपजाऊ जमीन बाढ़ में बह गई। चट्टानी पहाड़ी पर दो फिट से भी कम मिट्टी वाली जमीन कृषि उपयोगी नहीं है। भेड़ बकरी पालन भी सिमट गया है।

गांव से पलायन न करने की सजा

no development in uttarakashi kalap village.

इस गांव में कोई बेटी ब्याहने को राजी नहीं है। यहां 50 से ज्यादा विवाह योग्य बेरोजगार कुंवारे बैठे हैं। रक्त संबंधों में वैवाहिक रिश्तों की मजबूरी संतति पर भारी पड़ रही है।

2001 में इस गांव की कुल 426 की जनसंख्या थी। दस सालों के भीतर महज 43 का इजाफा हुआ जबकि गांव से पलायन भी नगण्य है।

कलाप गांव के लोगों को पलायन न करने की सजा मिल रही है। पीएम नरेंद्र मोदी की सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत यदि इस गांव को गोद लेकर विकास किया जाए तो इसका भला हो सकता है।
- पूजा रावत, पूर्व ब्लाक प्रमुख मोरी

हमारे गांव में मूलभूत सुविधाएं तो दूर आजीविका के साधन भी सिमट गए हैं। दुनिया से अलग-थलग पड़े इस गांव में कोई बेटी ब्याहने को राजी नहीं है। गांव के 70 फीसदी लोग एक जाति के तीन कुनबों के बीच वैवाहिक रिश्ते बनाने को मजबूर हैं।
- वरदान सिंह, निवासी कलाप गांव

रक्त संबंधों में वैवाहिक रिश्ते के कारण संतान का गर्भ में ही मरने, पैदा होने के कुछ समय बाद मरने तथा अपंग होने के साथ ही रक्त कैंसर जैसी खून संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है।
- डॉ. आरएस खड़ायत, उत्तरकाशी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed