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Dehradun News: एनजीटी की तल्ख टिप्पणी ने मलिन बस्ती के लोगोें की बढ़ाई धड़कन
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Iएनजीटी ने उत्तराखंड सरकार के मलिन बस्तियों को सुरक्षित करने वाले अध्यादेश को कठघरे में किया खड़ा I
Iएनजीटी की तल्ख टिप्पणी ने मलिन बस्ती के लोगोें की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इसके बाद मलिन बस्तियों में अफरातफरी मची है। वहीं, नगर निगम भी सरकार का रुख भांपने में लगा है।I
Iदरअसल, एनजीटी ने रिस्पना नदी किनारे अतिक्रमण पर तल्ख टिप्पणी करते हुए उत्तराखंड सरकार के मलिन बस्तियों को सुरक्षित करने वाले अध्यादेश को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कहा है कि केंद्र सरकार के पर्यावरण संरक्षण को लेकर बनाए गए कानून को राज्य सरकार अधिग्रहीत नहीं कर सकती। इसके बाद एक बार फिर नगर निगम की इन बस्तियों में रहने वालों की चिंता बढ़ गई है। चुनावी माहौल में डूबी इन मलिन बस्तियों में बृहस्पतिवार को एनजीटी का यह आदेश चर्चा का विषय रहा।I
I129 मलिन बस्तियों में हैं 40 हजार आशियानेI
Iदेहरादून में करीब 129 मलिन बस्तियां हैं, जो 2016 से पहले बनी हुई हैं। इनमें करीब 40 हजार घर बने हैं। उत्तराखंड सरकार इन घरों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में एक अध्यादेश लाई थी, जिसकी अवधि तीन साल है। इसी को लेकर एनजीटी ने आदेश किए हैं।
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I
Iशहरी निकाय के अधिकारियों के साथ हुई निगम की बैठकI
Iएनजीटी के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को शहरी निकाय के अधिकारियों के साथ नगर निगम के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें कानून को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और प्रदेश सरकार के अध्यादेश को लेकर बात हुई।I
Iअतिक्रमण के नाम पर बार-बार बस्ती वालों को डराया जा रहा है। जब भी चुनाव आते हैं, उसी समय मलिन बस्ती में अतिक्रमण दिखाई दे जाता है। - अशोक कुमार शर्मा,
संजय कॉलोनीI
Iमेहनत-मजदूरी कर छोटे-छोटे मकान बनाए हैं। यदि मकान बनाना गलत था तो जब मकान बनाए जा रहे थे तो उस समय सरकार ने क्यों नहीं रोका। - नमन कुमार,
पूरण बस्ती
I
Iमलिन बस्तियों में गरीब लोग रहते हैं। इन क्षेत्रों में सरकार ने भी विकास कार्य के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। जब यह नदी पर कब्जा ही था तो पहले क्यों किसी को याद नहीं आई।
- उदयवीर मल्ल
I
Iबस्तियों के लोगों में हर समय डर रहता है कि पता नहीं आखिर कब उनके मकान टूट जाएं। सरकार को बस्तियों को लेकर मजबूती से कदम उठाना चाहिए। - अजय
I
Iसरकारी भूमि पर मकान बनाने की बात गलत है। लोगों ने पैसे देकर जमीन खरीदी है। कई-कई बार मकान बिक चुके हैं और खरीदे जा चुके हैं। जिस समय निर्माण हो रहा था, यदि यह गलत था तो रोकना चाहिए था।
- अशोक
I
Iशहरी विकास और नगर निगम के अधिकारी मजबूती से अपना पक्ष एनजीटी में नहीं रख पा रहे हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव से मिलकर वार्ता की जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो उच्चतम न्यायालय का भी सहारा लिया जाएगा। मलिन बस्तियों को बचाया जाएगा।
- राजकुमार,
कांग्रेस नेता और पूर्व विधायकI
Iहम इस मुद्दे को लेकर या तो एनजीटी में रिव्यू पिटीशन लगाएंगे। या फिर कानूनी सलाह के आधार पर अग्रिम कदम उठाया जाएगा।
- नमामि बंसल, नगर आयुक्तI
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Iएनजीटी की तल्ख टिप्पणी ने मलिन बस्ती के लोगोें की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इसके बाद मलिन बस्तियों में अफरातफरी मची है। वहीं, नगर निगम भी सरकार का रुख भांपने में लगा है।I
Iदरअसल, एनजीटी ने रिस्पना नदी किनारे अतिक्रमण पर तल्ख टिप्पणी करते हुए उत्तराखंड सरकार के मलिन बस्तियों को सुरक्षित करने वाले अध्यादेश को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कहा है कि केंद्र सरकार के पर्यावरण संरक्षण को लेकर बनाए गए कानून को राज्य सरकार अधिग्रहीत नहीं कर सकती। इसके बाद एक बार फिर नगर निगम की इन बस्तियों में रहने वालों की चिंता बढ़ गई है। चुनावी माहौल में डूबी इन मलिन बस्तियों में बृहस्पतिवार को एनजीटी का यह आदेश चर्चा का विषय रहा।I
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I129 मलिन बस्तियों में हैं 40 हजार आशियानेI
Iदेहरादून में करीब 129 मलिन बस्तियां हैं, जो 2016 से पहले बनी हुई हैं। इनमें करीब 40 हजार घर बने हैं। उत्तराखंड सरकार इन घरों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में एक अध्यादेश लाई थी, जिसकी अवधि तीन साल है। इसी को लेकर एनजीटी ने आदेश किए हैं।
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Iशहरी निकाय के अधिकारियों के साथ हुई निगम की बैठकI
Iएनजीटी के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को शहरी निकाय के अधिकारियों के साथ नगर निगम के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें कानून को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और प्रदेश सरकार के अध्यादेश को लेकर बात हुई।I
Iअतिक्रमण के नाम पर बार-बार बस्ती वालों को डराया जा रहा है। जब भी चुनाव आते हैं, उसी समय मलिन बस्ती में अतिक्रमण दिखाई दे जाता है। - अशोक कुमार शर्मा,
संजय कॉलोनीI
Iमेहनत-मजदूरी कर छोटे-छोटे मकान बनाए हैं। यदि मकान बनाना गलत था तो जब मकान बनाए जा रहे थे तो उस समय सरकार ने क्यों नहीं रोका। - नमन कुमार,
पूरण बस्ती
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Iमलिन बस्तियों में गरीब लोग रहते हैं। इन क्षेत्रों में सरकार ने भी विकास कार्य के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। जब यह नदी पर कब्जा ही था तो पहले क्यों किसी को याद नहीं आई।
- उदयवीर मल्ल
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Iबस्तियों के लोगों में हर समय डर रहता है कि पता नहीं आखिर कब उनके मकान टूट जाएं। सरकार को बस्तियों को लेकर मजबूती से कदम उठाना चाहिए। - अजय
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Iसरकारी भूमि पर मकान बनाने की बात गलत है। लोगों ने पैसे देकर जमीन खरीदी है। कई-कई बार मकान बिक चुके हैं और खरीदे जा चुके हैं। जिस समय निर्माण हो रहा था, यदि यह गलत था तो रोकना चाहिए था।
- अशोक
I
Iशहरी विकास और नगर निगम के अधिकारी मजबूती से अपना पक्ष एनजीटी में नहीं रख पा रहे हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव से मिलकर वार्ता की जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो उच्चतम न्यायालय का भी सहारा लिया जाएगा। मलिन बस्तियों को बचाया जाएगा।
- राजकुमार,
कांग्रेस नेता और पूर्व विधायकI
Iहम इस मुद्दे को लेकर या तो एनजीटी में रिव्यू पिटीशन लगाएंगे। या फिर कानूनी सलाह के आधार पर अग्रिम कदम उठाया जाएगा।
- नमामि बंसल, नगर आयुक्तI