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एनजीटी के फरमान ने उड़ाई लोगों की नींद
ब्यूरो / अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Fri, 05 Feb 2016 03:55 PM IST
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तीन सालों से ठंडे बस्ते में पड़ा संवेदी क्षेत्र कानून का मसला एक बार फिर सुर्खियों में है। एनजीटी की ओर से गोमुख से उत्तरकाशी तक सौ किमी क्षेत्र में सभी गतिविधियों पर रोक लगाने के फरमान ने क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ा दी है।
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एनजीटी के अनुसार अब क्षेत्र में उनकी अनुमति से ही कोई कार्य किए जा सकेंगे। राज्य सरकार को संवेदी क्षेत्र के विकास के लिए जोनल मास्टर प्लान 28 फरवरी तक एनजीटी के समक्ष पेश करना है। इसके लिए छह फरवरी को देहरादून में मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है।
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गंगा भागीरथी को वर्ष 2010 में राष्ट्रीय नदी घोषित करने के बाद राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने गंगा संरक्षण के लिए गोमुख से उत्तरकाशी तक संवेदी क्षेत्र घोषित करने की आवश्यकता जताई थी। दिसंबर 2012 में बाकायदा गजट नोटिफिकेशन जारी कर गोमुख से उत्तरकाशी तक सौ किमी हिस्से में कुल 4179.59 वर्ग किमी क्षेत्र को संवेदी क्षेत्र घोषित कर दिया गया।
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इसमें उत्तरकाशी जिला मुख्यालय समेत भटवाड़ी ब्लाक के 88 गांव आ रहे हैं। तब से स्थानीय जनता एवं जनप्रतिनिधि इसका निरंतर विरोध कर रहे हैं। इस कारण न तो अभी तक संवेदी क्षेत्र के विकास के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार हो पाया और न ही अधिसूचना में लगाए गए प्रतिबंधों का अनुपालन हो पा रहा है।
इसे गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने अब संवेदी क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि पर रोक लगाने का फरमान जारी किया है, जिससे क्षेत्र में बिना एनजीटी की अनुमति के निजी निर्माण के साथ ही बाढ़ सुरक्षा तथा सड़क, पुल, सीवर ट्रीटमेंट आदि अन्य जनहित की योजनाएं ठप पड़ने की आशंका है।
हालांकि एनजीटी ने आपदा के कार्यों को 31 मार्च तक पूरा करने का समय दिया है, लेकिन इतने समय में यह कार्य पूरा होना संभव नहीं दिख रहा।
एनजीटी के फरमान के बाद हरकत में आयी राज्य सरकार ने 28 फरवरी से पहले जोनल मास्टर प्लान के साथ संवेदी क्षेत्र कानून लागू करने में आ रही व्यवहारिक दिक्कतें और इसमें जरूरी संशोधन एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए छह फरवरी को देहरादून में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है।
स्थानीय स्तर पर संवेदी क्षेत्र के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। छह फरवरी को देहरादून में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इसे प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में संवेदी क्षेत्र कानून लागू करने में व्यवहारिक दिक्कतों तथा संशोधन के बिंदुओं पर भी चर्चा की जाएगी।
- विनय शंकर पांडेय, डीएम उत्तरकाशी