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नए बने नगर पंचायतों को मिलेगी एक-एक करोड़ की धनराशि
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नगर निगम के सभागार में मेयरों की बैठक लेते नगरीय आवास मंत्री बंशीधर भगत। अमर उजाला
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प्रदेश में नई बनीं सात नगर पंचायतों को राज्य सरकार एक-एक करोड़ रुपये की धनराशि देगी। इस धनराशि का इस्तेमाल पंचायतें अपने कार्यालय भवन के निर्माण के लिए करेंगीं। शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के सभी मेयर और गढ़वाल मंडल के पालिका व पंचायत अध्यक्षों की बैठक लेते हुए यह जानकारी दी। इसके लिए बजट में भी धनराशि का प्रावधान किया गया है।
शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने बताया कि प्रत्येक तीन माह में निकायों की बैठक आयोजित की जाएगी। अपर सचिव स्तर के अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। इसमें सभी मेयर को मुख्य नगर आयुक्त और पालिका व पंचायत अध्यक्षों को ईओ के साथ शामिल होना होगा। उन्होंने बताया कि बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी और निकाय अध्यक्ष व अधिकारी को आमने-सामने बैठाकर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निकाय अध्यक्षों के आदेश का पालन करना ही होगा। जनहित के मुद्दों पर बहानेबाजी नहीं चलेगी। अध्यक्षों ने निकाय क्षेत्र की भूमि का मालिकाना हक संबंधित निकाय को देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इससे अतिक्रमण रोका जा सकेगा और भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में हो सकेगा। भगत ने शहरी निकायों की भूमि के संरक्षण, प्रबंधन के लिए योजना बनाने और जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार व राजस्व की भूमि को शहरी निकायों में निहित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
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छोटे भवनों को कर मुक्त करने की मांग
ऋषिकेश मेयर अनीता ममगाई ने शहरी विकास मंत्री से छोटे भवनों को कर मुक्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण मध्यमवर्गीय लोगों के सामने आर्थिक संकट बढ़ गया है। इसको देखते हुए एक हजार स्क्वायर फीट से छोटे भवनों को कर मुक्त कर लोगों को राहत दी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने निकायों की स्थिति सुधारने के लिए राज्य वित्त आयोग की धनराशि में इजाफा करने की भी मांग की।
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शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने बताया कि प्रत्येक तीन माह में निकायों की बैठक आयोजित की जाएगी। अपर सचिव स्तर के अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। इसमें सभी मेयर को मुख्य नगर आयुक्त और पालिका व पंचायत अध्यक्षों को ईओ के साथ शामिल होना होगा। उन्होंने बताया कि बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी और निकाय अध्यक्ष व अधिकारी को आमने-सामने बैठाकर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को निकाय अध्यक्षों के आदेश का पालन करना ही होगा। जनहित के मुद्दों पर बहानेबाजी नहीं चलेगी। अध्यक्षों ने निकाय क्षेत्र की भूमि का मालिकाना हक संबंधित निकाय को देने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि इससे अतिक्रमण रोका जा सकेगा और भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में हो सकेगा। भगत ने शहरी निकायों की भूमि के संरक्षण, प्रबंधन के लिए योजना बनाने और जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार व राजस्व की भूमि को शहरी निकायों में निहित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
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छोटे भवनों को कर मुक्त करने की मांग
ऋषिकेश मेयर अनीता ममगाई ने शहरी विकास मंत्री से छोटे भवनों को कर मुक्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण मध्यमवर्गीय लोगों के सामने आर्थिक संकट बढ़ गया है। इसको देखते हुए एक हजार स्क्वायर फीट से छोटे भवनों को कर मुक्त कर लोगों को राहत दी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने निकायों की स्थिति सुधारने के लिए राज्य वित्त आयोग की धनराशि में इजाफा करने की भी मांग की।