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नवरात्र के पहले दिन माता के दरबार में रही श्रद्धालुओं की भीड़
ब्यूरो / अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Fri, 22 Sep 2017 08:19 AM IST
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नवरात्र के पावन पर्व के आरंभ होते ही देहरादून सहित उत्तरकाशी जनपद के सभी देवी मंदिरों में सजावट व पूजा अर्चना शुरू हो गई है। उत्तरकाशी जिले के बाडाहाट शहर के शक्ति मंदिर, कुटेटी देवी, महिषासुरमर्दिनी, अन्नपूर्णा, दुर्गा आदि मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का नव दुर्गा के दर्शन व आशीर्वाद पाने के लिए मदिरों में तांता लगा रहा।
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धनारी क्षेत्र के बालखिला पर्वत पर स्थित नांगणी देवी मंदिर को एक सिद्धपीठ माना जाता है। समुद्र तल से करीब 9 हजार फीट की ऊंचाई पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 5 किमी का ट्रैक करना पड़ता है। केदारखंड के स्कंध पुराण में भी बालखिला पर्वत का उल्लेख किया गया है। मान्यता के अनुसार महर्षि बालखिल्य ने इसी स्थान पर कठोर तप किया था जिससे प्रसन्न होकर शिव भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि, सदियों तक लोग इस पर्वत को उनके नाम से जानेंगे और जो भी व्यक्ति यहां पर आएगा उसके सात जन्मों के पाप धुल जाएंगे।
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इसी पर्वत पर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सन् 1990 के करीब इस मंदिर को बनाया गया था। मंदिर के आसपास से कई प्राचीन मूर्तियां व एक कद्दू के आकार का गोल पत्थर भी पाया गया था। जिसे मंदिर की छत पर लगाया गया है। मंदिर के जीर्णोद्धार में चिल्मुड़, ढुंगाल, बगसारी सहित आसपास के कई गांवों के लोग सहयोग करते रहते हैं।
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वहीं एरावत पर्वत पर स्थित कुटेती देवी मंदिर का भी बहुत महत्व है। इस मंदिर के पुजारी याजकों की 14वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर के साथ जुड़ी कहानी के अनुसार, गंगोत्री की तीर्थ यात्रा में कोटा के एक राजा का कीमती थैला खो गया था। निराश राजा उत्तरकाशी लौट आए और विश्वनाथ मंदिर में थैला मिलने के लिए प्रार्थना की। जिसके बाद वह थैला मंदिर के एक पुजारी ने राजा को ढूंढ कर दे दिया। इससे प्रसन्न होकर राजा ने अपनी बेटी की शादी स्थानीय लड़के से कर दी।
हालांकि, इससे राजकुमारी दुखी हो गई क्योंकि उसे कुल देवी 'कुटेती देवी' से दूर होना पड़ा था। राजकुमारी और उसके पति ने इसका समाधान पाने के लिए देवी से प्रार्थना की। जिसके बाद, देवी ने सपने में प्रकट होकर कहा कि वे उन्हें अपने खेत में एक पत्थर के स्वरूप में पा सकते हैं। जिसके बाद दोनों को खेत से तीन बहुमूल्य पत्थर मिले। कुटेती देवी मंदिर उसी स्थान पर बनाया गया है जहां ये पत्थर मिले थे।