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जान का 'रिस्क' लेकर इन्होंने दुनिया में कमाया नाम

Thu, 10 Sep 2015 04:09 PM IST
योगेश जोशी / अमर उजाला, चंपावत
योगेश जोशी / अमर उजाला, चंपावत Updated Thu, 10 Sep 2015 04:09 PM IST
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naveen karki took risk on bike riding in hilly roads.

पहाड़ों की रपटीली राहों पर बाइक चलाना कभी भी आसान नहीं है। ऐसे में यहां का एक युवक न केवल आसानी के साथ बाइक चलाता है, बल्कि उसके द्वारा दोनों हाथ छोड़कर बाइक चलाना, देखने वालों में सिहरन भी पैदा करता है।

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उत्तराखंड में चंपावत के नवीन सिंह कार्की कई बार ये कारनामा कर चुके हैं। इसके चलते इस नौजवान ने लिम्का बुक, इंडिया बुक और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मुकाम पाया है। नवीन की उपलब्धियों में एक और उपलब्धि शामिल हो रही है। वियतनाम के एक विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि के लिए चयनित किया है।
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चंपावत से लगे खर्ककार्की के हयात सिंह कार्की के बेटे नवीन कार्की (35) के लिए 2007 से बाइक की सवारी जुनून है। बाइक के साथ नए-नए प्रयोग करना उनका शौक रहा है। तेज गति से बाइक चलाने से एक कदम आगे बढ़कर उन्होंने हाथ छोड़कर सवारी की राह चुनी।
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2009 में देहरादून से मसूरी के 70 किलोमीटर के आने और जाने के फासले को नवीन ने हाथ छोड़कर पूरा किया। यह उनका पहला सफर था। इसके बाद 2011 में चंपावत से घाट तक 50 किलोमीटर का सफर हैंडफ्री (हाथ छोड़कर) बाइक से तय किया।

‘नाम बनते हैं रिस्क से’ कार्यक्रम को रवाना हुए नवीन

naveen karki took risk on bike riding in hilly roads.

बरेली से रामपुर और लखनऊ के मोटर मार्ग में भी हाथ छोड़कर वह करतब दिखा चुके हैं। इन प्रदर्शनों पर नवीन कार्की को इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में चयनित किया गया है।

अमर उजाला और माउंटेन ड्यू की ओर से ‘नाम बनते हैं रिस्क से’ कार्यक्रम के लिए चंपावत के नवीन कार्की का चयन हुआ है। सोमवार को उन्हें नोएडा में उपस्थित होना है। इसके लिए रविवार को नवीन यहां से रवाना हो गए हैं।

प्रशासन से नहीं मिली मदद
साहसिक अभियान के लिए नौजवान नवीन कार्की की प्रशासन ने कई बार पीठ थपथपाई है, लेकिन उन्हें मदद के नाम पर एक धेला नहीं मिला।

नवीन ने बताया कि साहसिक कोटे से सरकारी नौकरी या अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता का तीन साल पूर्व प्रशासन से आग्रह किया था, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। नवीन 2003 में खर्ककार्की के ग्राम प्रधान भी रह चुके हैं।

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