न मानें हड़ताली कर्मी तो निकाल दें: हाईकोर्ट
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उत्तराखंड में हड़ताली मिनिस्ट्रीयल कर्मियों के बाद अब हाईकोर्ट ने सचिवालय कर्मचारियों की हड़ताल पर सख्ती दिखाई है। सचिवालय में 12 नवंबर से जारी कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि हड़ताल समाप्त कराने के तत्काल प्रयास करें।
हड़ताल खत्म नहीं की जाती है तो हड़ताली कर्मियों को हटाने की कार्रवाई अमल में लाई जाए। न्यायालय ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत तौर पर शपथपत्र दाखिल कर 24 दिसंबर तक मामले से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
एक्टिंग चीफ जस्टिस वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी अधिवक्ता दीप जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सचिवालय कर्मी अवैध मांगों के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।
नियम विरुद्ध है कार्य बहिष्कार
सप्ताह में पांच दिन के स्थान पर छह दिन कार्य के कैबिनेट के फैसले के विरोध में सचिवालय संघ ने बेमियादी कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है, जो नियम विरुद्ध है।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को आदेशित किया कि वह हड़ताल समाप्त कराने के लिए तुरंत प्रयास करें।
फिर भी यदि हड़ताल खत्म नहीं होती है तो हड़ताली कर्मियों को हटाने की कार्रवाई की जाए। इसके अलावा वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, जिससे काम प्रभावित न हों।
बताते चलें कि मिनिस्ट्रीयल कर्मियों की बेमियादी हड़ताल पर पांच नवंबर को हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि सरकारी कर्मियों की मांगें चाहे कुछ भी क्यों न हों, वे हड़ताल नहीं कर सकते।