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नैनीताल हाईकोर्ट: वतन वापस भेजने की चीनी नागरिकों की याचिका पर सरकार से मांगा जवाब
Wed, 22 Dec 2021 03:06 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 22 Dec 2021 03:06 PM IST
सार
वर्ष 2019 में उत्तराखंड पुलिस ने आरोपियों को बनबसा में गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि वे बनबसा के रास्ते नेपाल जा रहे थे और उनसे भारतीय मतदाता पहचान पत्र भी मिला था।
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नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : PTI
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विस्तार
वतन वापस भेजने देने के मामले में दायर चार चीनी नागरिकों की याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार को 27 दिसंबर तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
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चीनी नागरिक वांग गुवांग, शू जेन, निहेपैंग और लियोजीनकांग वर्ष 2018 में भारत घूमने आए थे। उन्हें मुम्बई पुलिस ने सोने की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बाद में इन लोगों को महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया था।
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वर्ष 2019 में उत्तराखंड पुलिस ने इन्हें बनबसा में गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप था कि वे बनबसा के रास्ते नेपाल जा रहे थे और उनसे भारतीय मतदाता पहचान पत्र भी मिला था। पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120बी 467 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
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निचली अदालत ने फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनवाने के कारण उक्त की जमानत याचिका निरस्त कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाइकोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। पूर्व में हाईकोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर कहा था कि चारों अभियुक्त प्रति सप्ताह बनबसा थाने में हाजिरी देंगे।
अब चारों ने अपने वतन वापसी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें उनके वतन वापस भेजा जाए। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के इसी प्रकार के प्रकरण का हवाला देते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने आठ से दस लाख रुपये की शर्त के तहत नागरिकों को उनके वतन जाने की अनुमति दी है।
इस तर्क का विरोध करते हुए सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि ऐसी शर्त रखते पर शायद वे ट्रायल के लिए वापस नहीं आएंगे। उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाएगा। वतन लौट जाने के बाद वे वापस नहीं आएंगे। कोर्ट ने फिलहाल याचियों को कोई राहत नहीं दी है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 दिसंबर की तिथि नियत करते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है।