सिविल जज दीपाली शर्मा केस में हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाई पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब
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हाईकोर्ट ने हरिद्वार की सिविल जज दीपाली शर्मा के विरुद्ध चल रही निचली अदालत की कार्यवाई पर रोक लगाते हुए सरकार को तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। दीपाली शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मालूम हो कि इसी साल जनवरी में हरिद्वार की सिविल जज दीपाली शर्मा के खिलाफ मिले शिकायती पत्र के आधार पर मुख्य न्यायाधीश की ओर से जिला जज हरिद्वार को जांच करने के निर्देश दिए गए थे।
जांच के बाद जिला जज की ओर से सिडकुल हरिद्वार थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। 29 जनवरी को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिद्वार ने एसएसपी हरिद्वार को नाबालिग किशोरी की बरामदगी के निर्देश दिए।
एसएसपी हरिद्वार की ओर से गठित टीम ने नाबालिग को सिविल जज के सरकारी आवास से बरामद करने का दावा किया था। सिविल जज पर किशोरी के मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप था। पूछने पर किशोरी ने खुद को नैनीताल के पदमपुरी इलाके का बताया था। उसके शरीर पर चोट के निशान देख उसे मेडिकल जांच के लिए महिला चिकित्सालय हरिद्वार ले जाया गया, जहां 20 से अधिक चोटों की पुष्टि हुई।
किशोरी को बाद में बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। किशोरी के मेडिकल रिपोर्ट की प्रतिलिपि जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपी गई। उधर जिला जज की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने सिविल जज को निलंबित कर दिया था। गिरफ्तारी से बचने और प्राथमिकी निरस्त करने की मांग को लेकर सिविल जज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इधर, हाईकोर्ट पूर्व में ही सिविल जज को बहाल करने के आदेश पारित कर चुका है।