उत्तराखंड सरकार पर हाईकोर्ट की सख्ती, कहा क्यों न सीबीआई से कराई जाए छात्रवृत्ति घोटाले की जांच
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समाज कल्याण के छात्रवृत्ति घोटाले मामले में शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से दो टूक पूछा कि क्यों न इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।
खंडपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पक्षकार बनाने और सभी पक्षकारों को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान की समाज कल्याण के छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार यह भी पूछा कि एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों हुई।
14 अगस्त को अपर सचिव समाज कल्याण ने भी सीबीआई जांच के लिए कहा था। कोर्ट ने कहा कि सरकार बताए कि अपर सचिव की संस्तुति पर उसने (प्रदेश सरकार) क्या कदम उठाए।
याची का कहना था कि समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति बांटने में करोड़ों का घोटाला किया है। शिकायत के बाद विभाग ने जांच की तो इसमें जांच कमेटी ने कोई घोटाला न होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी। शासन ने खुद जांच कर इसमें बड़ा घोटाला होने की बात कही।
बाद में शासन ने एसआईटी से जांच करवाने का निर्णय लिया लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। याची ने इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। अब मामले की सुनवाई तीन जनवरी को होगी।