{"_id":"69591f0e2451db6348068cad","slug":"nagendra-dutt-molu-bhardari-live-on-in-people-hearts-historical-fair-immortal-heroes-tehri-people-revolution-2026-01-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"टिहरी जनक्रांति: लोगों के दिलों में जिंदा हैं नागेंद्र दत्त और मोलू भरदारी, अमर नायकों याद में ऐतिहासिक मेला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टिहरी जनक्रांति: लोगों के दिलों में जिंदा हैं नागेंद्र दत्त और मोलू भरदारी, अमर नायकों याद में ऐतिहासिक मेला
Sat, 03 Jan 2026 07:26 PM IST
रेनू सकलानी
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर गढ़वाल
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर गढ़वाल
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 03 Jan 2026 07:26 PM IST
सार
नागेंद्र दत्त और मोलू भरदारी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। टिहरी जनक्रांति के अमर नायकों की याद में 11 जनवरी को ऐतिहासिक मेले का आगाज होगा।
विज्ञापन
उत्तराखंड, श्रीनगर गढ़वाल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
देश की आजादी के बाद टिहरी रियासत को गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले अमर शहीद नागेंद्र दत्त सकलानी और मोलू भरदारी की शहादत को कीर्तिनगर आज भी पूरे सम्मान और गर्व से याद करता है। हर वर्ष उनकी स्मृति में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक मेला इस बार 11 जनवरी से 14 जनवरी तक आयोजित होगा।
विज्ञापन
नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. राकेश मोहन मैठाणी ने बताया कि शहीद मेले का शुभारंभ भव्य रूप से किया जाएगा। मेले में स्कूली बच्चों की आकर्षक झांकियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां होंगी। मेले उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी रामलीला मैदान में करेंगे।
विज्ञापन
ये भी पढे़ं..Uttarakhand: अंकिता हत्याकांड...न्याय की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, यमकेश्वर विधायक के आवास का घेराव
विज्ञापन
कौन थे नागेंद्र सकलानी और मोलू भरदारी
15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो चुका था लेकिन टिहरी रियासत अब भी राजशाही के अधीन थी। इस अन्याय के खिलाफ जनआंदोलन तेज हो रहा था। 10 जनवरी 1948 को प्रजामंडल के युवा नेता नागेंद्र दत्त सकलानी के नेतृत्व में त्रेपन सिंह नेगी, किसान नेता दादा दौलत राम आदि सैकड़ों लोगों ने कीर्तिनगर के न्यायालय और अन्य सरकारी भवनों को घेर लिया। रियासत की फौज और प्रशासन को आत्मसमर्पण करना पड़ा और कीर्तिनगर को आजाद घोषित करते हुए ‘कीर्तिनगर आजाद पंचायत’ की स्थापना की गई। 11 जनवरी 1948 को जब आंदोलनकारी टिहरी कूच की तैयारी कर रहे थे, तभी नरेंद्रनगर से भेजी गई शाही फौज ने दोबारा कब्जा करने का प्रयास किया। इसी संघर्ष में शाही फौज के अधिकारी कर्नल डोभाल की गोलियों से कामरेड नागेंद्र सकलानी और मोलू भरदारी वीरगति को प्राप्त हो गए थे।