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Dehradun News: पांचवीं पास लोगों को करा रहा था 10वीं और 12वीं, पुलिस ने किया गिरफ्तार
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पांचवीं पास युवक लोगों को 10वीं और 12वीं के सर्टिफिकेट बांट रहा था। आरोपी ने नेशनल काउंसिल फॉर रिसर्च नाम का एक एजुकेशन ट्रस्ट बनाया था। 10 से 12 हजार रुपये लेकर इस ट्रस्ट के 10वीं और 12वीं के सर्टिफिकेट बांटे जा रहे थे। पुलिस ने मंगलवार देर शाम आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से बहुत से ब्लैंक सर्टिफिकेट और अन्य सामग्री बरामद हुई है।
पुलिस को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि एमडीडीए कॉम्प्लेक्स में एक ऑफिस में 10वीं और 12वीं के सर्टिफिकेट बनाए जा रहे हैं। पुलिस ने एक ट्रैप तैयार किया। वहां अपने एक साथी को भेजा और 12वीं की मार्कशीट के लिए बात की। ऑफिस में बताया गया कि 15 हजार रुपये लगेंगे। बाद में सौदा आठ हजार रुपये में हो गया।
उसे मंगलवार शाम को मार्कशीट लेने के लिए बुलाया गया था। शाम के वक्त जब पुलिस का भेजा व्यक्ति मार्कशीट लेने पहुंचा तो पीछे से पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने रामकिशोर निवासी गाजीपुर को हिरासत में ले लिया। पता चला कि वह खुद पांचवीं पास है। उसने नेशनल काउंसिल फॉर रिसर्च नाम से एक फर्जी एजुकेशन ट्रस्ट बनाया है। वह इसी की मार्कशीट मुहैया कराता था।
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पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि यह ट्रस्ट मान्य ही नहीं है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके साथ मुजफ्फरनगर निवासी एक व्यक्ति और रहता है। वह भी इसी काम में लगा हुआ है। पुलिस को अभी यह व्यक्ति हाथ नहीं लगा है। पुलिस इस कार्रवाई का अधिकारिक रूप से बुधवार को खुलासा करेगी।
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बिहार की सरकारी सेवाओं में भी कई 12वीं पास
आरोपी ने बताया कि वह स्थानीय लोगों से कम बात करता है। उसके पास मार्कशीट और सर्टिफिकेट लेने के लिए ज्यादातर उत्तराखंड से बाहर के लोग आते हैं। उसने बिहार के कई लोगों को मार्कशीट बेची है। इनमें से कई लोग बिहार की सरकारी सेवाओं में काम कर रहे हैं। पुलिस अब इस मामले की जांच में भी जुट गई है कि उसने कितने स्थानीय लोगों को इस तरह की मार्कशीट मुहैया कराई है।
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आश्रय फाउंडेशन के नाम से खोला था ऑफिस
आरोपी ने कॉम्प्लेक्स में आश्रय फाउंडेशन नाम से ऑफिस खोला था। इसमें वह इस काम के साथ-साथ अन्य काम भी करता था। आरोपी ने बैंक ऑफ बड़ौदा का बोर्ड भी लगाया हुआ था। यहां पर वह इस बैंक के लिए एजेंट के रूप में काम करता था। इसके अलावा अन्य जॉब वर्क भी किए जाते थे।
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पुलिस को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि एमडीडीए कॉम्प्लेक्स में एक ऑफिस में 10वीं और 12वीं के सर्टिफिकेट बनाए जा रहे हैं। पुलिस ने एक ट्रैप तैयार किया। वहां अपने एक साथी को भेजा और 12वीं की मार्कशीट के लिए बात की। ऑफिस में बताया गया कि 15 हजार रुपये लगेंगे। बाद में सौदा आठ हजार रुपये में हो गया।
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उसे मंगलवार शाम को मार्कशीट लेने के लिए बुलाया गया था। शाम के वक्त जब पुलिस का भेजा व्यक्ति मार्कशीट लेने पहुंचा तो पीछे से पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने रामकिशोर निवासी गाजीपुर को हिरासत में ले लिया। पता चला कि वह खुद पांचवीं पास है। उसने नेशनल काउंसिल फॉर रिसर्च नाम से एक फर्जी एजुकेशन ट्रस्ट बनाया है। वह इसी की मार्कशीट मुहैया कराता था।
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पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि यह ट्रस्ट मान्य ही नहीं है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके साथ मुजफ्फरनगर निवासी एक व्यक्ति और रहता है। वह भी इसी काम में लगा हुआ है। पुलिस को अभी यह व्यक्ति हाथ नहीं लगा है। पुलिस इस कार्रवाई का अधिकारिक रूप से बुधवार को खुलासा करेगी।
बिहार की सरकारी सेवाओं में भी कई 12वीं पास
आरोपी ने बताया कि वह स्थानीय लोगों से कम बात करता है। उसके पास मार्कशीट और सर्टिफिकेट लेने के लिए ज्यादातर उत्तराखंड से बाहर के लोग आते हैं। उसने बिहार के कई लोगों को मार्कशीट बेची है। इनमें से कई लोग बिहार की सरकारी सेवाओं में काम कर रहे हैं। पुलिस अब इस मामले की जांच में भी जुट गई है कि उसने कितने स्थानीय लोगों को इस तरह की मार्कशीट मुहैया कराई है।
आश्रय फाउंडेशन के नाम से खोला था ऑफिस
आरोपी ने कॉम्प्लेक्स में आश्रय फाउंडेशन नाम से ऑफिस खोला था। इसमें वह इस काम के साथ-साथ अन्य काम भी करता था। आरोपी ने बैंक ऑफ बड़ौदा का बोर्ड भी लगाया हुआ था। यहां पर वह इस बैंक के लिए एजेंट के रूप में काम करता था। इसके अलावा अन्य जॉब वर्क भी किए जाते थे।