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उत्तराखंड में नहीं खुले बैंक, 2000 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन प्रभावित
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 23 Aug 2017 08:19 AM IST
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सरकारी बैंकों की अखिल भारतीय हड़ताल से राजधानी की बैंकिंग व्यवस्था पर भी विपरीत असर पड़ा। सभी सरकारी बैंक बंद होने से किसी भी तरह का लेन-देन नहीं हो पाया। अनुमान है कि हड़ताल से प्रदेश में दो हजार करोड़ से ज्यादा का लेन देन प्रभावित हुआ है।
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वहीं अकेले दून में ही 500 करोड़ का नुकसान हुआ है। एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसे निजी बैंक खुले जरूर लेकिन क्लियरेंस का काम नहीं हुआ। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर राज्य के 15 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। बताया गया है कि राज्य में दो हजार बैंक शाखाएं पूर्णतया बंद रही।
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बैंक न खुलने के कारण उद्यमी, व्यापारियों समेत अन्य ग्राहकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्राहक बैंकों में न राशि जमा कर पाए और न ही नगदी निकाल पाए। अनुमान है कि हड़ताल से पांच सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
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सितंबर में संसद मार्च होगा
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की परेड मैदान में आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार का रवैया नकारात्मक है। इसके कारण ही अखिल भारतीय स्तर पर बैंक हड़ताल की गई।
सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। इस मसले पर आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत सितंबर में संसद मार्च होगा और तब भी सरकार उदासीन रही तो नवंबर में दो दिन हड़ताल की जाएगी। इस दौरान चंद्रकांत जोशी, पीआर कुकरेती, हरिओम रेखी, आरके गैरोला, एमएल नौटियाल, जीपी सुंदरियाल ने भी विचार व्यक्त किए।
भले ही एक दिवसीय हड़ताल में सरकारी बैंककर्मी शामिल रहे लेकिन उन्हें निजी बैंककर्मियों का नैतिक समर्थन मिला। निजी क्षेत्र के बैंकों में काम का बहुत दबाव और अस्थिरता से प्राइवेट सेक्टर के कार्मिकों रोष है। संगठन के नेता पीआर कुकरेती का कहना है कि जल्द ही निजी बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी भी हमारे साथ होंगे।
सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। इस मसले पर आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत सितंबर में संसद मार्च होगा और तब भी सरकार उदासीन रही तो नवंबर में दो दिन हड़ताल की जाएगी। इस दौरान चंद्रकांत जोशी, पीआर कुकरेती, हरिओम रेखी, आरके गैरोला, एमएल नौटियाल, जीपी सुंदरियाल ने भी विचार व्यक्त किए।
भले ही एक दिवसीय हड़ताल में सरकारी बैंककर्मी शामिल रहे लेकिन उन्हें निजी बैंककर्मियों का नैतिक समर्थन मिला। निजी क्षेत्र के बैंकों में काम का बहुत दबाव और अस्थिरता से प्राइवेट सेक्टर के कार्मिकों रोष है। संगठन के नेता पीआर कुकरेती का कहना है कि जल्द ही निजी बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी भी हमारे साथ होंगे।