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प्रदेश के हर जिले में स्थापित होंगे मॉडल सहकारिता गांव : डॉ. धन सिंह
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अध्ययन भ्रमण पर गुजरात जाएंगे विभिन्न समितियों के 50 सचिव
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश के हर जिले में एक मॉडल सहकारिता गांव स्थापित किया जाएगा। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभागीय अधिकारियों को रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह कहना है सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का। उन्होंने यह बात अपने शासकीय आवास पर विभाग की बैठक में कही।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि संस्कृत गांव की तर्ज पर हर जिले में मॉडल सहकारिता गांव बनाए जाएंगे। इन गांवों में सहकारी बैंक, सीएससी सेंटर एवं सहकारी बाजार की स्थापना की जाएगी। सहकारी बाजार स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान समूहों एवं ग्रामीण उत्पादकों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना एवं सहकारिता आधारित आत्मनिर्भर मॉडल विकसित करना है।
वहीं, सहकारी समितियों के 50 सचिवों को अध्ययन भ्रमण के लिए गुजरात भेजा जाएगा। भ्रमण में विशेष रूप से शैशवावस्था में कार्य कर रही समितियों के सचिवों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वे सफल मॉडलों का अध्ययन कर अपनी समितियों को सशक्त बना सकें।
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विभागीय मंत्री ने कहा, होली के बाद संयुक्त निबंधक, अपर निबंधक एवं प्रभारी अधिकारी अपने जिलों में ब्लॉक स्तर पर समीक्षा बैठक करेंगे। वहीं, घाटे में चल रही समितियों को उबारने के लिए ग्राउंड जीरो पर रणनीति बनाकर ठोस कार्ययोजना लागू की जाएगी। बैठक में सभी पैक्स एवं एपेक्स समितियों की नियमित बोर्ड बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए गए। विभागीय मंत्री ने कहा, सहकारी समितियों एवं बैंकों में शत-प्रतिशत नियुक्तियां आईबीपीएस के माध्यम से की जाएं एवं 15 मार्च तक भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए। बैठक में सचिव सहकारिता डॉ इकबाल अहमद, निबंधक सहकारी समितियां डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक सहकारिता ईरा उप्रेती, आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल, एमपी त्रिपाठी, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल, सहायक निबंधक मुख्यालय राजेश चौहान, बलवंत सिंह मनराल आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश के हर जिले में एक मॉडल सहकारिता गांव स्थापित किया जाएगा। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभागीय अधिकारियों को रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह कहना है सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का। उन्होंने यह बात अपने शासकीय आवास पर विभाग की बैठक में कही।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि संस्कृत गांव की तर्ज पर हर जिले में मॉडल सहकारिता गांव बनाए जाएंगे। इन गांवों में सहकारी बैंक, सीएससी सेंटर एवं सहकारी बाजार की स्थापना की जाएगी। सहकारी बाजार स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान समूहों एवं ग्रामीण उत्पादकों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना एवं सहकारिता आधारित आत्मनिर्भर मॉडल विकसित करना है।
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वहीं, सहकारी समितियों के 50 सचिवों को अध्ययन भ्रमण के लिए गुजरात भेजा जाएगा। भ्रमण में विशेष रूप से शैशवावस्था में कार्य कर रही समितियों के सचिवों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वे सफल मॉडलों का अध्ययन कर अपनी समितियों को सशक्त बना सकें।
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विभागीय मंत्री ने कहा, होली के बाद संयुक्त निबंधक, अपर निबंधक एवं प्रभारी अधिकारी अपने जिलों में ब्लॉक स्तर पर समीक्षा बैठक करेंगे। वहीं, घाटे में चल रही समितियों को उबारने के लिए ग्राउंड जीरो पर रणनीति बनाकर ठोस कार्ययोजना लागू की जाएगी। बैठक में सभी पैक्स एवं एपेक्स समितियों की नियमित बोर्ड बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए गए। विभागीय मंत्री ने कहा, सहकारी समितियों एवं बैंकों में शत-प्रतिशत नियुक्तियां आईबीपीएस के माध्यम से की जाएं एवं 15 मार्च तक भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए। बैठक में सचिव सहकारिता डॉ इकबाल अहमद, निबंधक सहकारी समितियां डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक सहकारिता ईरा उप्रेती, आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल, एमपी त्रिपाठी, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल, सहायक निबंधक मुख्यालय राजेश चौहान, बलवंत सिंह मनराल आदि मौजूद रहे।